तेजप्रताप यादव, लालू प्रसाद और राबड़ी देवी के पुत्र हैं इसलिए राजद का कोई संविधान, कोई नियम, कोई अनुशासन उन पर तब भी नहीं चलेगा जब वे कुशेश्वरस्थान में कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करेंगे? या लालू प्रसाद कोई नजीर पेश करेंगे ? यह सवाल राजद के अंदर-बाहर दोनों तरफ उठ रहा है। ज्यादातर लोगों को यह कॉन्फिडेंस है कि लालू प्रसाद कुछ नहीं करेंगे। तेजस्वी कुछ नहीं करेंगे। प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह जैसे नेता भी कुछ नहीं करेंगे। तेजप्रताप यादव का पत्र सामने आ चुका था जब तेजस्वी तारापुर के लिए पटना से रवाना हो रहे थे। लेकिन इस पत्र पर कोई जवाब नहीं दिया तेजस्वी ने। लालू प्रसाद का भी बयान नहीं आया। राजद, तेजप्रताप यादव के पत्र को विश्वसनीय नहीं मानता।


तेजप्रताप यादव ने पत्र जारी करने में चालाकी दिखाई
अब तेजप्रताप यादव की चालाकी भी देख लीजिए। छात्र जनशक्ति परिषद् के पैड पर तेजप्रताप यादव के हस्ताक्षर से यह चिट्ठी जारी हुई कि छात्र जनशक्ति परिषद् तारापुर में राजद के उम्मीदवार और कुशेश्वरस्थान में कांग्रेस के उम्मीदवार को समर्थन देंगे। यानी वे 50-50 का खेल राजनीति में खेल रहे हैं। तेजप्रताप यादव को डर भी है कि विधायकी न चली जाए। ट्वीटर पर या छात्र जनशक्ति परिषद् के फेसबुक पेज पर भी पत्र को नहीं डाला गया है। आगे मुकरने का पूरा स्कोप रखा गया है। कोई बयान भी तेजप्रताप यादव ने इससे जुड़ा नहीं दिया है। राजनीति में यह डर दोनों तरफ है। लालू प्रसाद के लिए एक तरफ पुत्र मोह है और दूसरी तरफ है पार्टी। तेजप्रताप यादव की तरफ से मोर्चा खोल दिया गया है और लालू परिवार में किसी अन्य को बोलते नहीं बन रहा।
दो स्थिति में विधायकी जा सकती है
उपचुनाव में नामांकन वापस लेने के अंतिम दिन शनिवार को तेजप्रताप ने यह खेल किया। इसके बाद कई सवाल उठने लगे हैं। तेजप्रताप यादव की विधायकी भी जा सकती है! लेकिन यह तभी जाएगी जब कोई शिकायत लेकर विधानसभा के स्पीकर के पास जाएगा। दूसरी स्थिति में तब विधायकी जा सकती है जब उनकी पार्टी सस्पेंड करे।

राजद के अंदर का लोकतंत्र मजबूत हो रहा है कि कमजोर यह लालू-तेजस्वी बेहतर जानते हैं
यह तो तेजप्रताप यादव ने राजद के आम से लेकर खास कार्यकर्ताओं तक को समझा दिया है कि वे किसी पर कुछ भी बयान दें या कोई भी पार्टी विरोधी कार्रवाई करें उन पर सीधे-सीधे कार्रवाई इतना आसान नहीं। जगदानंद सिंह को हिटलर कहने के बाद भी तेज प्रताप पर कार्रवाई नहीं हुई, कार्रवाई तो हुई छात्र जनशक्ति परिषद के पोस्टर से नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का फोटो गायब करने से। वह भी छात्र जनशक्ति परिषद के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष आकाश पर। हालांकि पार्टी ने प्रशिक्षण शिविरों में तेजप्रताप यादव को बुलाना छोड़ दिया, लेकिन किसी तरह की कार्रवाई नहीं की। रघुवंश प्रसाद सिंह पर तो उन्होंने एक लोटा पानी वाला बयान ऐतिहासिक बयान ही दे दिया था। तेजप्रताप यादव के बयानों, उनकी गतिविधियों, छात्र जनशक्ति परिषद् के गठन और कांग्रेस के प्रत्याशी की समर्थन देने से राजद के अंदर का लोकतंत्र मजबूत हो रहा है या कमजोर यह लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव से ज्यादा कोई नहीं जान सकता।

राजद का कहना है कि इस पत्र की कोई विश्वसनीयता नहीं है
राजद के प्रवक्ता चित्तरंजन गगन कहते हैं कि जो पत्र जारी किया गया है उसकी विश्वसनीयता ही नहीं है। चुनाव के समय विरोधी पार्टी के लोग इस तरह की गतिविधियां करते हैं। इसलिए इस पर कोई प्रतिक्रिया ही नहीं दी जा सकती।
जरा इतिहास पर गौर कर लें
जब प्रो. जाबिर हुसेन बिहार विधान परिषद के सभापति थे उस समय कांग्रेस के शिवनंदन प्रसाद और महाचंद्र प्रसाद सिंह निर्दलीय चुनाव लड़ गए थे। तब जाबिर हुसेन ने दोनों की सदस्यता खत्म करवा दी थी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया, बड़े वकील भी रखे गए लेकिन सदस्यता वापस नहीं हो पाई। जब ताराकांत झा बिहार विधान परिषद के सभापति थे उस समय जेडीयू के पार्षद प्रेम कुमार मणि की सदस्यता नीतीश कुमार के पत्र देने के बाद चली गई थी। मणि पर पार्टी विरोधी लाइन लेने का आरोप लगाया गया था। विधान सभा चुनाव में पार्टी विरोधी कार्य करने पर राजद ने चुनाव के बाद डेढ़ दर्जन नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था।



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