सरकारी स्कूलों के स्टूडेट्स पर कोरोना का बड़ा असर दिख रहा है। लॉकडाउन में लंबे समय तक स्कूलों से दूर हुए स्टूडेंट्स में अब गणित के सामान्य सवालों को हल करने के साथ रीडिंग की क्षमता में भी कमी दिख रही है। सरकारी स्कूल के टीचरों ने क्लास 5 से 8 तक के स्टूडेंट्स में इस कमजोरी को महसूस किया है। इसमें 90 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जो ऑनलाइन स्टडी के लिए सक्षम नहीं रहे। शिक्षा विभाग को भी इसकी सूचना है जिसे लेकर अब स्कूलों में बच्चों को जोड़ने को लेकर विशेष मुहिम चल रही है। वर्ष 2018 में आई प्रथम संस्था की ASER की सर्वे रिपोर्ट में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 35 प्रतिशत स्टूडेंट्स का रीडिंग लेबल सही पाया गया था, लेकिन 2019 के बाद से हालात काफी खराब हो गए हैं। ऐसे में आने वाली सर्वे रिपोर्ट चौंकाने वाली हो सकती है।

साल दर साल खराब हो रहा रीडिंग लेबल
बिहार में सरकारी स्कूलों के छात्रों में गणित के सामान्य सवालों को हल करने और रीडिंग की क्षमता बेहतर रही है। बिहार में शिक्षा पर काम करने वाली संस्था प्रथम के ASER सर्वे के मुताबिक क्लास 2 में पढ़ाई करने वाले छात्रों से 2 अंकों के गणित के सवाल और क्लास 4 के छात्रों से 3 अंको के सवाल को हल करने की अपेक्षा की जाती है। 2008 में आई ASER की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी स्कूलों में पढ़ाई करने वाले कक्षा 5 से 8 तक के छात्रों में सामान्य गणित को हल करने के साथ रीडिंग की क्षमता 80.5 प्रतिशत थी जबकि राष्ट्रीय औसत 67.2 प्रतिशत था। लेकिन 2018 के सर्वे में बिहार का औसत 41.1 प्रतिशत हो गया और राष्ट्रीय औसत 46 प्रतिशत पहुंच गया। ASER की सर्वे के मुताबिक 2014 से बिहार में सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे छात्रों में गिरावट देखी जा रही है। कोरोना काल में स्थिति और खराब हो रही है।

बिहार में बदलाव का किया जा रहा प्रयास
बिहार में शिक्षा को लेकर काम करने वाली संस्था प्रथम ने लॉक डाउन में बच्चों की शैक्षणिक एक्सरसाइज को जारी रखने का प्रयास किया है। संस्था CEO शिक्षाविद रुक्मिणी बनर्जी का कहना है कि लॉकडाउन में भी बच्चों की एजुकेशन प्रैक्टिस पर जोर दिया गया है। उनका कहना है कि ‘कोविड के दौरान, हमने सीखने की प्रक्रिया के साथ बच्चों के जुड़ाव को बनाए रखने से जुड़े तरीके खोजने में कड़ी मेहनत की है। लॉकडाउन के समय बच्चों के परिवारों को SMS से संदेश भेजा जाता था। राज्य सरकारों के साथ भी काम किया गया है। टीवी कंटेंट के लिए बिहार सरकार और रेडियो कार्यक्रमों के लिए महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर काम किया।

रुक्मिणी बनर्जी हाल ही में वैश्विक स्तर पर शिक्षा के क्षेत्र में मिलने वाले सर्वोच्च सम्मान ‘यिदान प्राइज’ से सम्मानित की गई हैं।

शिक्षा में सुधार को लेकर 10,000 से अधिक गांवों में बड़े पैमाने पर मोहल्ला लर्निंग कैंपेन शुरू किया गया है। बिहार में टोला सेवकों और जीविका दीदियों ने इस क्षेत्र में अहम भूमिका निभाई है। रुक्मिणी बनर्जी हाल ही में वैश्विक स्तर पर शिक्षा के क्षेत्र में मिलने वाले सर्वोच्च सम्मान ‘यिदान प्राइज’ से सम्मानित की गई हैं। इस सम्मान के लिए वह दुनिया के 130 शिक्षाविदों व रिसर्चरों में अव्वल रही हैं। दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से ग्रेजुएशन और स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से मास्टर्स तथा 1991 में शिकागो यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने वाली रुक्मिणी को बिहार की शिक्षा को लेकर काफी अनुभव है।
सरकारी स्कूलों में विशेष तैयारी
लॉकडाउन के बाद सरकारी स्कूलों में बच्चों की स्किल को लेकर विशेष तैयारी है। लंबे समय से स्कूलों से दूर रहने वाले बच्चों की पढ़ाई को लेकर टीचरों को विशेष ध्यान देने को कहा जा रहा है। छात्रों की रीडिंग क्षमता के साथ गणित के सामान्य सवालों को हल करने के लिए उनपर विशेष धयान दिया जा रहा है। जिला शिक्षा पदाधिकारियों को शिक्षा विभाग से निर्देशित किया गया है कि शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर विशेष ध्यान दिया जाए। इसके साथ ही निर्देश यह भी दिया गया है कि जो बच्चे स्कूलों की नियमित नहीं आ रहे हैं उन्हें लेकर विशेष प्रयास किए जाएं।

पटना के सभी सरकारी स्कूलों को जिला शिक्षा पदाधिकारी की तरफ से आदेश दिया गया है कि शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए। कोरोना काल में बच्चों पर असर पड़ा है, इसकी पूर्ति के लिए टीचर विशेष तैयारी कराएं। कोरोना काल में हुए बच्चों की शिक्षा के नुकसान को लेकर सरकारी स्कूलों में विशेष पहल की जा रही है। शिक्षा मंत्री विजय चौधरी शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर लगातार प्रयास कर रहे हैं। कोरोना काल के बाद से ही सरकारी स्कूलों में बच्चों को जोड़ने को लेकर कई नए प्रयोग भी किए गए हैं। शिक्षा मंत्री विजय चौधरी के आदेश पर कोरोना के साइड इफेक्ट को दूर करने के लिए ही कई इनोवेटिव काम किया जा रहा है।



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