BIHARBreaking NewsSTATE

जनकपुरधाम के धनुष सागर में नौका विहार करते हुए रावण दहन करेंगे मर्यादा पुरुषोत्तम

जनकपुरधाम में रावण दहन की भव्य तैयारी कर ली गई है। शुक्रवार शाम 6:30 बजे रावण वध होगा। इस बार संध्या आरती के बाद दूल्हा राम मंदिर के गर्भगृह से धनुष सागर में भाई लक्ष्मण के साथ निकलेंगे। नौका विहार करते हुए पहले कुंभकर्ण का वध करेंगे। इसके बाद भाई लक्ष्मण मेघनाद का वध करेंगे। अंत में दूल्हा राम, रावण का वध करेंगे। इसकी तैयारी महावीर युवा कमेटी के सदस्यों की देखरेख में की जा रही है। भारत के नामचीन कलाकारों ने रावण का पुतला बनाया है। इस बार लंका दहन का भी कार्यक्रम रखा गया है।

महावीर युवा कमेटी के सदस्य पंकज जायसवाल ने बताया- ‘करीब 1 घंटे तक चलने वाले कार्यक्रम में सुरक्षा के पूरे बंदोबस्त किए गए हैं। श्रीराम के भक्तों को लेकर खासा इंतजाम किए गए हैं। लाइटिंग के भी इंतजाम किए गए हैं। रावण का करीब 35 फीट का पुतला बनाया गया है। साथ ही इस बार मेघनाद और कुंभकर्ण का भी पुतला दहन होगा। कोविड नियमों का पालन करते हुए कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी है।’

विश्व में कहीं नहीं होता है रावण वध का ऐसा कार्यक्रम

मिथिला पाहुन यानी दामाद के सत्कार के लिए विख्यात है। कहा जाता है, यहां का दामाद बनना भी सौभाग्यशाली लोगों को ही नसीब होता है। हो भी क्यों न, जब स्वयं श्रीनारायण मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में मिथिला के दामाद बने तो अन्य मानवों की बात ही क्या है! दामाद रूपी श्रीराम की ससुराल यानी मां जानकी की जन्मस्थली जनकपुर नेपाल में दशहरा बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। जनकपुर में आयोजित होने वाला दशहरा महोत्सव इतना भव्य होता है कि नेपाल समेत भारत के कई राज्यों से लोग आते हैं।

राजदेवी दशहरा महोत्सव के संयोजक समिति के सदस्य घनश्यामदास मिश्रा ने बताया- ‘हर साल लगभग 100 फीट ऊंचे रावण को पाहुन श्रीराम धनुष सागर में नौका विहार करते हुए मुक्ति देते हैं। मान्यता है कि मिथिला में पाहुन के पैर जमीन से स्पर्श न करें, इसलिए धनुष सागर में विहार करते हुए रावण वध का आयोजन होता है। यह विश्व में कहीं नहीं होता है।’

कुंभकर्ण व मेघनाद का भी होता है दहन

जनकपुर निवासी घनश्याम मिश्रा बताते हैं- ‘भारत में रावण का दहन होता है, क्योंकि रावण ने भारत की बहू का हरण किया था, लेकिन जनकपुर में बेटी के हरणकर्ता का दहन किया जाता है। रावण के अलावा युद्ध में रावण का पक्ष लेने वाले उनके पुत्र मेघनाद व भाई कुम्भकर्ण का भी दहन किया जाता है। दहन के दौरान नेपाल के कोने-कोने से लाखों की संख्या में लोग जुटते हैं। हालांकि, कोरोना के कारण लोगों की उपस्थिति में इस बार अंतर जरूर आएगा।’

झिझिया महोत्सव का भी होता है आयोजन

दशहरे के दौरान तंत्र मंत्र के जानकार सिद्धि के लिए कठिन परिश्रम करते हैं। सिद्धि पाने के बाद इसका दुरुपयोग करते हैं। वैसे लोगों को सिद्धि प्राप्त न हो, इसलिए मिथिला में मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए झिझिया किया जाता है। इसमें कन्याएं घड़े के ऊपर घड़ा लेकर नृत्य करती हैं। ताकि कोई दुष्ट आत्मा सिद्धि न प्राप्त कर पाएं। नेपाल के सबसे प्रसिद्ध राजदेवी मंदिर (नेपाल महाराज की कुल देवी) में भव्य झिझिया महोत्सव आयोजित किया जाता है। इसमें कई देशों के कलाकार सम्मलित होते हैं।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.