ग्रहण मात्र एक खगोलीय घटना भर नहीं है बल्कि हिंदू धर्म शास्त्रों में धार्मिक रूप से भी इनकी अहमियत खास मानी जाती है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार साल 2020 का पहला चंद्रग्रहण पौष पूर्णिमा को लग रहा है। आइए जानते हैं आचार्य शैलेश तिवारी के अनुसार वर्ष के पहले चंद्रग्रहण का राशियों पर कैसा रहेगा प्रभाव:
यह चंद्र ग्रहण मिथुन राशि में पुनर्वसु नक्षत्र के दौरान घटित होगा| इसलिए मिथुन राशि के जातकों पर इस ग्रहण का विशेष प्रभाव देखने को मिलेगा। यह चंद्र ग्रहण भारत समेत यूरोप, अफ्रीका, एशिया और ऑस्ट्रेलिया के कुछ भागों से देखा जा सकेगा।

चंद्र ग्रहण पर नहीं लगेगा सूतक :
इस नववर्ष दस जनवरी शुक्रवार के दिन वर्ष के पहला पड़ने वाला ग्रहण केवल उप छाया चंद्र ग्रहण है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक उपछाया चंद्र ग्रहण को शास्त्रों में ग्रहण की श्रेणी से बाहर रखा गया है। यही वजह है कि चंद्र ग्रहण लगने पर जहां सूतक लगता है। वहीं उपछाया चंद्र ग्रहण पर सूतक नहीं लगता है। इस दौरान ना तो मंदिरों के कपाट बंद किए जाते हैं और ना ही धार्मिक कार्य करने से मनाही होती है।
क्या होता है उपछाया चंद्र ग्रहण :
चंद्र ग्रहण के होने से पहले चंद्रमा पृथ्वी की उपछाया में प्रवेश करता है, जिसे चंद्र मालिन्य कहते हैं। अंग्रेजी इस स्थिति को Penumbra कहा जाता है। इसके बाद वह पृथ्वी की असल छाया में प्रवेश करता है। जब ऐसा होता है तब वास्तविक ग्रहण होता है। लेकिन कई बार चंद्रमा उपछाया में प्रवेश करते उपछाया शंकु से बाहर आ जाता है औऱ वह भू-भाग में प्रवेश नहीं करता है।

जिसके कारण चंद्रमा की तस्वीर (बिंब) केवल धुंधली पड़ती है काली नहीं इस धुंधलेपन को सामान्य रुप से देखा जा सकता है। इसलिए चंद्र मालिन्य होने से केवल उपछाया चंद्र ग्रहण होता है, चंद्र ग्रहण नहीं।यह चंद्र ग्रहण मिथुन राशि में पुनर्वसु नक्षत्र के दौरान घटित होगा इसलिए मिथुन राशि के जातकों पर इस ग्रहण का विशेष प्रभाव देखने को मिलेगा। जैसा कि आप जानते हैं कि चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है। ऐसे में इस पर ग्रहण लगना आपके व्यक्तित्व और जीवन पर कितना प्रभावी होने वाला है। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों पर इस चंद्र ग्रहण का क्या प्रभाव पड़ेगा।
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