नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा है कि बिहार में बिजली दर देश में सबसे अधिक होने के बावजूद सरकार की नाकामियों के चलते आगामी दिनों में बिजली संकट गहराएगा। डबल इंजन सरकार कांटी और बरौनी के बिजली घर भी बंद कर रही है। डबल इंजन सरकार से बिहार को ट्रिपल नुकसान हो रहा है और हर क्षेत्र में ट्रबल ही ट्रबल।
तेजस्वी को जानकारी का अभाव, वे लालटेन युग वाले हैंः जदयू
जदयू प्रवक्ता और पूर्व मंत्री नीरज कुमार ने कहा है, ‘तेजस्वी यादव को जानकारी का बहुत अभाव रहता है। वे लालटेन युग वाले हैं। देश भर में कोयले का तात्कालिक संकट आया है। बिजली घरों को कोयला पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पा रहा है। देशव्यापी संकट है। इसलिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार वैकल्पिक ऊर्जा पर भी ध्यान देते हैं। तेजस्वी यादव यह बताते हैं कि लालटेन का ऐसे में क्या उपयोग हो सकता है। बिहार-झारखंड जब एक था, तब ध्यान नहीं था कि घर-घर बिजली कैसे पहुंचाएं। हमारी उपलब्धियों पर वे चिंता न करें’।

देश भर में घटा है ताप ऊर्जा का उत्पादन
कोयले की कमी की वजह से देश भर में ताप ऊर्जा का उत्पादन घटा है। बिहार को एनटीपीसी से 4500 मेगावाट बिजली मिलती है। अभी लगभग 3000 मेगावाट बिजली मिल रही है। इसी तरह निजी ताप ऊर्जा के उत्पादकों के द्वारा भी 688 मेगावाट की जगह सिर्फ 347 मेगावाट बिजली प्राप्त हो रही है। पवन ऊर्जा से 580 की जगह केवल 100 मेगावाट ही मिल रही है। मौसम परिवर्तन की वजह से इसमें सुधार की संभावना भी नहीं है।
बाजार में बिक्री के लिए बिजली की उपलब्धता कम रह गई है। इसलिए, इसकी दर 20 रुपए प्रति यूनिट तक चली गई है और बोली लगाने पर भी पर्याप्त मात्रा में बिजली नहीं मिल रही है। दुर्गापूजा को ध्यान में रखते हुए बाजार से अधिक दर पर भी बिजली खरीदने के लिए बोली लगाने का निर्णय लिया गया है।

बाजार से महंगी बिजली खरीदकर भी सस्ती बिजली देने का निर्णय
ऊर्जा सचिव संजीव हंस ने बताया है कि बिहार में बिजली कंपनियों के द्वारा अपना उत्पादन नहीं किया जाता बल्कि केन्द्रीय बिजली उत्पादन संस्थानों के द्वारा उत्पादित बिजली खरीद कर उपभोक्ताओं को दी जाती है। बाजार में वर्तमान कोयला संकट के कारण महंगी दर पर बिजली मिल रही है। महंगी बिजली खरीदकर भी उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली देने का निर्णय लिया गया है।




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