गया का रुक्मिणी तालाब, जिसके बारे में मान्यता है कि यहां नहाने से महिलाओं को संतान सुख की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि इस तालाब को भगवान कृष्ण ने बनवाया था। तालाब के पास एक अक्षयवट भी है। तालाब में नहाने के बाद महिलाएं अक्षयवट को गले लगाती है। इसके बाद आशीर्वाद मांगने पर पुत्र रत्न तक की प्राप्ति होती है। दरअसल, पितृपक्ष के कारण गया में देश-विदेश से हजारों की संख्या में लोग पिंड दान के लिए पहुंच रहे हैं। अक्षयवट के पास ही अंतिम पिंडदान किया जाता है। हम आपको इस अक्षयवट और रुक्मिणी तालाब के बारे में बता रहे हैं।
क्या है रुक्मिणी तालाब का महत्व
यह रुक्मिणी तालाब शहर के माड़नपुर मोहल्ले में है, जहां सालोंभर समान रूप से पानी रहता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी रुक्मिणी ने इसी तालाब में स्नान किया था। यहां स्थित मंगलागौरी मंदिर के पुजारी आकाश गिरी का कहना है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने इस तालाब को बनवाया था। यही वजह है कि यहां स्नान करने वालों को संतान सुख की प्राप्ति होती है।


क्या है अक्षयवट की मान्यता
अक्षयवट के बारे में स्थानीय पुजारी वीरन लाल दुबहलिया ने बताया कि पूरे देश में पांच अक्षयवट हैं। उन पांच में से एक यहां है। अक्षयवट को माता सीता ने अमर रहने का वरदान दिया है। अक्षयवट के पास अंतिम पिंडदान किया जाता है। इसके साथ ही इसका अलग धार्मिक महत्व भी है। महिलाएं संतान प्राप्ति के लिए स्थानीय ब्राह्मण से संकल्प कराने के बाद स्नान करती हैं और अक्षयवट का आलिंगन करती हैं। इसके बाद अपने आंचल को फाड़ कर अक्षयवट में बांध देती हैं।




Leave a Reply