जिले में बाढ़ के कारण हुए जलभराव की समस्या ने विकराल रूप धारण कर लिया है। इस वर्ष जिले में 102895 हेक्टेयर खेतों में जलजमाव हाेने के कारण 79889 हेक्टेयर में लगी खरीफ की फसलें बर्बाद हाे गई हैं। साथ ही अबतक अत्यधिक जलजमाव के कारण करीब 75 हजार हेक्टेयर में रबी फसल की बुआई होना भी मुश्किल है।
लगातार दूसरे वर्ष अत्यधिक जलजमाव के कारण खेती चाैपट हाे जाने तथा अगली फसल की बुआई पर भी ग्रहण लगने से किसान बुरी तरह परेशान हैं। जिले के सभी 16 प्रखंडों की 385 पंचायतों के 147983 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ की फसलें लगाई जाती है। अबतक बाढ़ से जिले के आधा दर्जन प्रखंडों में लगी फसलें ही बर्बाद हाेती थीं।


लेकिन, लगातार पिछले दो वर्षों से सामान्य से अधिक बारिश हाेने से पूरे क्षेत्र में अत्यधिक जलभराव हाे रहा है, जिससे खरीफ की फसलें बर्बाद हाे रही है। इसके साथ ही उद्यानिक फसलाें में आम, लीची के साथ ही केला की फसल काे जलजमाव के कारण काफी नुकसान हाे रहा है। फलदार पौधे के सूख जाने से किसानों काे दाेहरा घाटा उठाना पड़ता है।

- कुल आच्छादित रकबा 147983.49 हेक्टेयर
- कुल प्रभावित क्षेत्रफल 102895.79 हेक्टेयर
- फसल क्षति का आकलन 79889.74 हेक्टेयर
- फसल क्षति का प्रतिशत 69.53 प्रतिशत

किसानों को घाटा, जिले में लगाई गई फसलाें में 69.53 फीसदी बर्बाद
कृषि विभाग द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार, जिले में लगाई गई फसलाें में 69.53 फीसदी बर्बाद हाे चुकी है। जिसमें 78263 हेक्टेयर सिंचित जमीन में व 1346.75 हेक्टेयर असिंचित जमीन में लगी खरीफ फसलें बर्बाद हुईं हैं।

इसमें धान, मक्का, गन्ना के साथ ही उद्यानिक फसलें भी बर्बाद हुईं हैं। अगर इन क्षेत्रों से जल निकासी की व्यवस्था नहीं हाेगी ताे आगे भी खेती करना मुश्किल हाेगा। साथ ही खरीफ के बाद रबी की फसलें भी नहीं हाेने से किसानों काे व्यापक क्षति उठानी हाेगी।




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