मुजफ्फरपुर के सकरा थाना क्षेत्र के महमदपुर बनवारी गांव के एक बुजुर्ग बांग्लादेश की जेल से रिहा होकर सोमवार को घर पहुंचे। वे पिछले पांच साल से वहां की जेल में बंद थे। लंबे समय और अथक प्रयास के बाद जब वतन लौटे तो उत्सव सा माहौल हो गया। बुजुर्ग रामसुंदर पासवान (60) भटकते हुए 2016 में बॉर्डर पार करते हुए बांग्लादेश की सीमा में प्रवेश कर गए थे। वहां की पुलिस ने जासूस समझकर जेल में डाल दिया। गहनता से पूछताछ हुई। तब स्पष्ट हो गया की ये जासूस नहीं हैं।
अचानक से लापता होने के बाद बुजुर्ग के भाई शंकर पासवान समेत अन्य परिजन खोजबीन में जुटे रहे। करीब 13 महीने बाद उनलोगों को पता लगा की रामसुंदर बांग्लादेश की जेल में बंद हैं। इसके बाद DM, सांसद, विधायक को आवेदन सौंपा। पांच साल के प्रयास के बाद अब जाकर उनकी रिहाई हो सकी।



पश्चिम बंगाल में लाकर छोड़ा
शंकर पासवान ने बताया कि बांग्लादेश पुलिस ने उन्हें पश्चिम बंगाल के मालदह जिले के इंग्लिश थाना के सुपुर्द कर दिया। इसकी सूचना बरियारपुर पुलिस को दी गयी। तब यहां से परिजन उन्हें लेने गए। वहां से घर लेकर आये। वतन वापसी की बात सुनकर गांव के लोगों की भीड़ रामसुंदर को देखने के लिए जुट गई।

अब तक सदमे में हैं बुजुर्ग
रामसुंदर अबतक सदमे में हैं। वे ठीक से बोल भी नहीं पा रहे हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया की घर से काम की तलाश में निकले थे। भटकते हुए पता नहीं कैसे सीमा पार कर गए। वहां के जेल में अच्छा भोजन नहीं मिलता था। किसी तरह गुज़र बसर कर रहे थे। यह कहते हुए जेल में बिताए दिनों को याद करते हुए चुप हो जाते हैं। उनकी आंखों से आंसू छलक आते हैं। भाई समेत अन्य लोग उन्हें हिम्मत देते हैं।

पत्नी छोड़कर चली गई थी
शंकर ने बताया की शादी के कुछ दिन बाद ही उनके भाई की पत्नी उन्हें छोड़कर चली गयी थी। इससे उन्हें गहरा सदमा लगा था। इसके बाद वे अक्सर घर से बिना किसी को बताए निकल जाते थे। एक दो दिन खुद वापस आ जाते थे। 2016 में भी वैसा ही हुआ था। लेकिन, उस बार वापस लौटकर नहीं आएं।




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