उत्तर बिहार में धीरे-धीरे वायरल बुखार और वायरल ब्रोंकाइटिस्ट का असर कम होने लगा है। अब प्रतिदिन SKMCH में 10-12 केस ही आ रहे हैं। वहीं केजरीवाल अस्पताल में भी मरीजों के आने की संख्या में कमी आयी है। बीते 24 घन्टे में SKMCH में 10 तो केजरीवाल में 20 बच्चे भर्ती हुए हैं। SKMCH के पीकू वार्ड में 50 तो केजरीवाल में 72 बच्चों का इलाज़ चल रहा है। सभी की स्थिति ठीक है। कई बच्चें स्वस्थ्य होकर घर भी गए हैं। SKMCH के शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. गोपाल शंकर साहनी ने बताया कि मरीजों की संख्या ज़रूर कमी है। लेकिन, सजग रहने की आवश्यकता है। लापरवाही बरतने पर मामले तेज़ी से बढ़ सकते हैं। परिजन को इस समय अपने बच्चों की देखभाल विशेष रूप से करनी होगी। उन्होंने कहा कि पीकू वार्ड भी अब धीरे धीरे कम होने लग गया है।



एक से दो दिन रहता है खतरा :
डॉ. साहनी का कहना है कि इस बीमारी का असर या खतरा एक से दो दिन ही रहता है। लेकिन, पूरी तरह स्वस्थ्य होने में एक सप्ताह लग जाता है। समय से इलाज़ शुरू होता है जल्दी बच्चे स्वस्थ्य होते हैं। दो दिन में रिकवर कर लेते हैं। हल्की खांसी और दम फूलने की समस्या सिर्फ रहती है, जो एक सप्ताह में पूरी तरह समाप्त हो जाती है। इसलिये पैनिक करने की जरूरत नहीं है। वैसे भी अब मामले कम होने लगे हैं।

स्वास्थ्य विभाग अभी भी अलर्ट मोड पर :
सिविल सर्जन डॉ. विनय शर्मा ने बताया कि इस बीमारी के केस ज़रूर कम हुए हैं। पर अभी भी स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट है। सभी PHC प्रभारी और स्वास्थ्यकर्मी अपनी जिम्मेवारी निभा रहे हैं। साहेबगंज, कटरा और मीनापुर प्रखण्ड में विशेष निगरानी की जा रही है। क्योंकि सबसे अधिक केस वहीं से सामने आए थे। हालांकि, दवा का छिड़काव और जागरूकता अभियान चलाने के बाद इन इलाकों में भी मामले कम हुए हैं।




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