कुपोषित बच्चों की कमजोर इम्यूनिटी संक्रमण का खतरा बढ़ा रही है। संक्रमण के सीजन में ऐसे बच्चों में बीमारी की संख्या बढ़ गई है। सरकार की तरफ से ऐसे बच्चों की इम्यूनिटी बढ़ाने को लेकर पोषण अभियान चलाया जा रहा है। 30 सितंबर तक विशेष मुहिम के साथ बच्चों को कुपोषण और संक्रमण से बचाने को लेकर जन आंदोलन चलाया जाएगा।
बिहार में बच्चों पर संक्रमण का अटैक
बिहार में वायरल का कहर सबसे अधिक बच्चों पर है। पटना मेडिकल कॉलेज में 100 से अधिक बच्चे भर्ती हैं। पटना के प्राइवेट हॉस्पिटल की ओपीडी में 500 से अधिक बच्चे पहुंच रहे हैं। प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती बच्चों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। माना जा रहा है कि जिन बच्चों की इम्यूनिटी कमजोर हैं उनके वायरल बुखार तेजी से हो रहा है। बच्चों की मौत भी संक्रमण गंभीर होने पर हो रही है। इसमें ऐसे बच्चे शामिल हैं जो शारीरिक रूप से कमजोर हें, बीमारी से लड़ने की क्षमता नहीं बन पा रही है। डॉक्टर भी इस समय खान-पान और फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाकर इम्यूनिटी स्ट्रांग करने की सलाह दे रहे हैं।



कुपोषण के खिलाफ सामूहिक जंग की तैयारी
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय का कहना है कि बिहार में कुपोषण के खिलाफ सामूहिक जंग की जरूरत है। इसके लिए जनप्रतिनिधि, सेविका आदि सामाजिक स्तर पर जन जागरुकता फैलाने में अपने दायित्वों का सही रूप से निर्वहन करें। महिलाओं और बच्चों के पोषण स्तर की बेहतरी के उद्देश्य से इस वर्ष भी सितंबर को राष्ट्रीय पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है। कुपोषण एवं एनीमिया में कमी लाने के उद्देश्य से 30 सितंबर तक प्रदेश भर में जन-आंदोलन के रूप में राष्ट्रीय पोषण माह का आयोजन किया जाना है।

कुपोषण में बिहार की सेहत खराब
कुपोषण के मामले में बिहार का सबसे खराब हाल है। बच्चों के साथ गर्भवती महिलाओं में भी पोषण की कमी मिल रही है। वर्ष 2018 से देश में पोषण अभियान की शुरुआत ऐसे ही लोगों को पोषण के लिए की गई थी। भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास से आयोजित पोषण पखवाड़ा चलाया जाता है। इसमें राज्य सरकारों सहित विभिन्न विकास संस्थाओं से सक्रिय सहयोग कर गांव-गांव तक लोगों को जागरूक किया जाता है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर इस समय बड़ों को कोविड टीकाकरण, एनीमिया से बचाव के लिए आयरन फॉलिक एसिड सिरप, गुलाबी गोली, नीली गोली का वितरण किया जा रहा है। इसके साथ ही योग सत्र का आयोजन, उचित आहार एवं स्वच्छता के प्रति जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।




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