बागमती, गंडक और बूढ़ी गंडक की बाढ़ से शहर के निचले इलाकों और शहर से लगते ग्रामीण क्षेत्रों के भी 2 हजार से अधिक घराें में गुरुवार काे पानी घुस गया। बूढ़ी गंडक में तेजी से पानी बढ़ने के कारण मुशहरी, कांटी और मीनापुर प्रखंडों के लाेग सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। अखाड़ाघाट पुल से जीरोमाइल और मेडिकल कॉलेज इलाकों तक में सड़क किनारे और आसपास बसे मोहल्लों के लाेग तेजी से पलायन कर मुख्य सड़क या अन्य ऊंची जगहों पर पलायन कर रहे हैं। शहर के निचले इलाकों सिकंदरपुर, झील नगर, कर्पूरी नगर, चंदवारा, शेखपुर ढाब, अहियापुर, विजयी छपरा से कांटी के मिठनसराय सराय तक यही स्थिति है। लोग जरूरी सामान के साथ किसी तरह घर से पलायन कर रहे हैं।


तीनाें प्रमुख नदियों का खतरे के निशान से ऊपर हाेना बाढ़ की वजह
बाढ़ की एेसी स्थिति की वजह बागमती का जलस्तर में कमी के बावजूद कटौझा में खतरे के निशान से 36 सेंटीमीटर और बेनीबाद में 1 मीटर 23 सेंटीमीटर ऊपर बहना है। गंडक का पानी रेवा घाट में 12 सेंटीमीटर और बढ़ कर खतरे के निशान से 85 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। इससे पारू, साहेबगंज और सरैया प्रखंडों की 6000 से अधिक नई आबादी बाढ़ प्रभावित हो गई है।

शहरी क्षेत्र में बूढ़ी गंडक में पानी खतरे के निशान से 4 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच जाने से लाेग दहशत में हैं। उधर, वाल्मीकिनगर में गंडक बराज से गुरुवार शाम 4:00 बजे 1.94 लाख क्यूसेक पानी छाेड़ा गया। इसका असर जिले में गंडक और बूढ़ी गंडक के जलस्तर बढ़ने पर शुक्रवार काे दिखेगा।




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