PM नरेंद्र मोदी ने आज 80वें ‘मन की बात’ की। इस मन की बात में उन्होंने हॉकी के जादूगर कहे जाने वाने मेजर ध्यानचंद की चर्चा की। जन्माष्टमी को लेकर सभी को शुभकामनाएं दी। वहीं, स्वच्छ भारत अभियान को लेकर उन्होंने कई उदाहरण दिए। PM नरेंद्र मोदी ‘मन की चर्चा’ के दौरान बिहार के मधुबनी शहर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि मधुबनी में संचालित डॉ. राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय और वहां के स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र ने एक बेहतर प्रयास किया है। इसका लाभ किसानों को हो रहा है, साथ ही स्वच्छ भारत अभियान को भी नई ताकत मिल रही है। PM नरेंद्र मोदी ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय ने सुखेत मॉडल नाम का एक कार्यक्रम शुरू किया है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है गांवों में प्रदूषण को कम करना। इसका लाभ अब गांव के लोग उठाने लगे हैं।

PM नरेंद्र मोदी ने सुखेत मॉडल का जिक्र करते हुए बताया कि इसमें गांव के किसानों से गोबर, खेतों के कचरे और घरों से निकलने वाला अन्य कचरा इकट्ठा किया जाता है। उसके बदले में ग्रामीण को रसोई गैस सिलेंडर के पैसे दिए जाते हैं। जो कचरा गांव से जमा होता है, उसके निपटारे के लिए वर्मी कंपोष्ट का निर्माण किया जा रहा है। इस मॉडल से गांव के लोगों को लाभ हो रहा है। उन्हें इंधन की भी कोई कमी नही हो रही है।


सुखेत मॉडल के फायदे गिनाते हुए PM नरेंद्र ने बताया कि इससे चार लाभ स्पष्ट सामने नजर आ रहे हैं। पहला, गांव को कचरा और गंदगी से मुक्ति मिलेगी। दूसरा, गांव को प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी, तीसरा, गांव वालों को गैस सिलेंडर के लिए पैसे और चौथा, खेती के लिए जैविक खाद की उपलब्धता होगी। उन्होंने कहा- यह गांव की शक्ति को बढ़ा सकता है और यही आत्मनिर्भर भारत है। PM नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात में कई और उदाहरण दिए, जिसमें वाटर ट्रिटमेंट, प्रदूषण और आत्मनिर्भर भारत की चर्चा की।




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