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फिर भक्तिरस में डूबे तेजप्रताप, पहुंच गए वृंदावन:RJD में घमासान मचाने के बाद मन की शांति के लिए अपने गुरु वल्लभाचार्य से की मुलाकात

जब मन अशांत होता है तो लालू यादव के बड़े लाल तेजप्रताप यादव सीधे वृंदावन जाते हैं, लेकिन इस बार रक्षाबंधन था इसलिए वे दिल्ली गए। दिल्ली में अपने राजनीतिक गुरु लालू यादव से मुलाकात करने के बाद वे अपने अध्यात्मिक गुरु श्री वल्लभाचार्य से मिलने वृंदावन पहुंच गए हैं। उन्होंने गुरु से आशीर्वाद लेते हुए फोटो भी शेयर किया है।

एक दिन पहले दिल्ली स्थित मॉल में तेज दोस्तों के साथ दिखे थे। वह फोटो भी उन्होंने शेयर किया था। तेज बताते रहते हैं कि वे क्या कर रहे हैं और कहां है? इस मामले में उन्होंने तेजस्वी यादव से अलग छवि बनाई है। उनकी आलोचना उनकी उस वाणी की वजह से होती है जिसे समर्थक बिंदास बोल मानते हैं और विरोधी अनुशासनहीनता। नेता प्रतिपक्ष और छोटे भाई तेजस्वी यादव के साथ ही छोटी बहन रोहिणी ने तेज को नसीहत भी थी कि अनुशासनहीनता नहीं होनी चाहिए पार्टी में, बड़ों का सम्मान होना चाहिए।

अपने अध्यात्मिक गुरु श्री वल्लभाचार्य के साथ तेज प्रताप।

अपने अध्यात्मिक गुरु श्री वल्लभाचार्य के साथ तेज प्रताप।

गुरु से उनके आवास पर जाकर आशीर्वाद लिया

तेजप्रताप यादव की पसंदीदा जगह वृंदावन हैं। वे कृष्ण भक्त हैं और उन्होंने शंख के साथ बांसुरी बजाना भी सीखा है। वे कहते रहते हैं कि वे कृष्ण हैं और छोटा भाई तेजस्वी उनका अर्जुन, कृष्ण और अर्जुन की जोड़ी को कोई जुदा नहीं कर सकता। इस बार उनका ड्रेस भी नेता वाला नहीं है। उन्होंने पीतांबर धारण किया हुआ है। कुछ दिन पहले उन्होंने राष्ट्रकवि दिनकर की रश्मिरथी की पंक्तियां पोस्ट कर अपनी बात रखी थी।

तेजप्रताप वीर रस की कविता पोस्ट करने के बाद भक्तिरस की शरण में हैं। वे कहते भी हैं उन्हें सबसे ज्याद शांति वृंदावन में मिलती है। उन्होंने LR अगरबत्ती की फैक्ट्री भी पटना में लगाई है। वृंदावन में भगवान पर चढ़े फूलों से इसे बनवाते हैं। पीतांबरधारी तेज प्रताप को वृंदावन में गुरु आशीर्वाद दे रहे हैं। वृंदावन से जुड़े कई वीडियो उन्होंने पहले भी शेयर किया है।

पिछले दो सप्ताह से RJD में मचा था घमासान

पिछले दो सप्ताह से तेजप्रताप बिहार की राजनीति में विवादों में रहे हैं। छात्र राजद की ओर से आयोजित बैठक में राजद कार्यालय में उन्होंने सार्वजनिक मंच से अपनी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जदगानंद सिंह को हिटलर कहा था। हिटलर ही नहीं कहा, बल्कि उसकी व्याख्या भी की थी। उन्होंने कहा था- ‘पहले पिता जी के समय पार्टी कार्यालय का गेट पूरा खुला रहता था, लेकिन जब से पिता जी को विरोधी लोग फंसा दिए तब से मनमानी करना शुरू कर दिए। मनमानी करना शुरू कर दिए तो हमने मिमिक्री करना शुरू कर दिया। कुर्सी किसी की बपौती नहीं है। हम भी मंत्री रहे और हमको भी कुर्सी से हटना पड़ा। इसलिए हमें वैसी छाप छोड़ना चाहिए कि हमारी कुर्सी भी चली जाए तो लोग याद रखें।’

इस बयान के बाद जगदानंद सिंह ने पार्टी ऑफिस आना छोड़ दिया था। लालू प्रसाद के मनाने के बाद वे लौटे। इस बीच तेजप्रताप ने प्रेस कांफ्रेस कर तेजस्वी के रणनीतिकार संजय यादव को भी हटाने की मांग कर दी थी। तेजस्वी को भी नसीहत देने से वे पीछे नहीं हटे। अपने समर्थक आकाश को छात्र राजद के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने पर तेज का गुस्सा भड़क गया था।

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