दरभंगा जिले के बिरौल प्रखंड के अफजला में कमला नदी पर बना ये पुल 14 सालों से यहां की जनता को मुंह चिढ़ा रही है । दरअसल सुपौल बाज़ार को जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए वर्ष 2005 में तत्कालीन विधायक डॉ. इजहार अहमद ने जिरात और खेवा टोला के बीच कमला नदी पर एक पुल निर्माण की अनुशंसा की थी । जिसके बाद करीब 17 लाख रुपये की लागत से वर्ष 2007 में इस पुल का निर्माण किया गया । लेकिन आश्चर्य की बात है कि पुल निर्माण के 14 साल बीत जाने के बाद भी अब तक जिरात की ओर से पुल का एप्रोच पथ नहीं बन पाया है ।


जमीन का अधिग्रहण नहीं हुआ
दरअसल पुल के उत्तरी छोर पे कब्रिस्तान है और अन्य निजी जमीन है । विभाग के द्वारा पुल के एप्रोच पथ के लिए जमीन का अधिग्रहण किए बगैर ही इस पुल का निर्माण कर दिया गया । मजे बात तो ये है कि जब कमला नदी में पानी कम रहता है तब तो लोग किसी तरह इस पुल से पर हो जाते हैं । लेकिन जब नदी में पानी भर जाता है तब ये पुल नदी के ऊपर सिर्फ इंजीनियरिंग का एक नमूना बनकर रह जाता है । मतलब जिस मकसद से इस पुल का निर्माण किया जाता है वो उसके लिए ये पुल सक्षम नही है ।

एप्रोच पथ बनने से होगा फायदा
अगर इस पुल का एप्रोच पथ बन जाए तो बिरौल के हातगाछी, जिरात, करकौली से लोग इस पुल को पार कर सीधा बस स्टैंड, स्टेशन और डुमरी पहुंच सकते हैं । और सुपौल बाजार को जाम की समस्या से निजात मिल सकती है । लेकिन बिरौल के नप्रतिनिधियों और अधिकारियों का इस ओर कोई ध्यान नही है । या यूं कहें कि सरकारी योजना को धरातल पर उतारने के बजाय कमला नदी में डाल दिया गया जिसका एप्रोच पथ के बगैर कोई औचित्य नही है । इस पुल के उत्तरी छोर पे जिरात मुहल्ले में बिहार सरकार के मत्स्य एवं पशुपालन मंत्री मुकेश सहनी का घर भी है ।




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