कोरोना का खतरा टला नहीं है। दूसरी के बाद अब तीसरी लहर का खतरा है। मास्क और सोशल डिस्टेंस को लेकर पूरे देश में अलर्ट है। रेलवे में कोरोना को लेकर कोई खौफ नहीं है। यात्रियों से लकर रेल प्रशासन तक लापरवाह है। कोरोना के खतरे को लेकर भास्कर ने ट्रेनों की बड़ी पड़ताल की है। बिहार की राजधानी पटना से लेकर यूपी की राजधानी लखनऊ तक के सफर में कोरोना गाइडलाइन की पोल खुल गई है। ट्रेनों में कोरोना को लेकर अिना आरक्षित टिकट के यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया है, लेकिन बोगियों में सामान्य दिनों की तरह यात्रियों की भीड़ है। न तो स्टेशनों पर कोई जांच हो रही है और ना ही ट्रेन में कोई पूछने वाला है। यात्रियों से भरी हर ट्रेन कोरोना का खतरा लेकर दौड़ रही है। पटना से लखनऊ जाने वाली 02529 लखनउ पाटलिपुत्रा सुपर फास्ट एक्सप्रेस में की पड़ताल में सामान्य दिनों जैसा हाल दिखा।

पाटलिपुत्रा स्टेशन पर नहीं कोई पड़ताल
पाटलिपुत्रा जंक्शन से खुलने वाली गाड़ियों में काफी भीड़ होती है। इस कारण से इस रूट से चलने वाली ट्रेन 02529 को चुना गया। यह ट्रेन सुपर फास्ट है और पटना से गोरखपुर होते हुए लखनऊ की यात्रा करने वालों की भीड़ रहती है। पाटलिपुत्रा स्टेशन पर ट्रेन पकड़ने वालों की कोई थर्मल स्कैनिंग और जांच नहीं कराई गई। टिकट को लेकर भी कोई जांच नहीं की गई। ट्रेन शाम 4.30 पर खुली, ट्रेन में कुल 16 बोगियां लगाई गईं। इसमें 13 बोगी में यात्री और एक पार्सल इसके बाद एक इंजन व गार्ड की बोगी शामिल है। C1 से लेकर C2 तक एसी बोगी और फिर D1 से लेकर D11 तक चेयरकार लगाई गई। एसी बोगी में सीट से अधिक यात्री नहीं दिखाई पड़े लेकिन D1 से लेकर D11 तक चेयरकार में कोरोना की कोई गाइडलाइन नहीं दिखी। 70 प्रतिशत यात्रियों के मुंह पर मास्क नहीं दिखा। भीड़ तो सामान्य दिनों की जनरल वाली बोगी जैसी रही।

D1 से लेकर D11 तक कहीं नहीं दिखा सोशल डिस्टेंस
D1 चेयरकार बोगी में रेलवे ने हर सीट बुक की थी। दो सीट के बीच में कोई गैप नहीं था। सिनेमा घरों में 50 प्रतिशत उपस्थिति के साथ हर सीट के बीच में एक गैप का निर्देश है लेकिन ट्रेन की बोगी में ऐसा कोई नियम नहीं दिखा। बोगी में हर टीट पर भीड़ दिखी, देखने से ही लग रहा था रेलवे ने जितना रिजर्वेशन किया है उससे अधिक यात्री यात्रा कर रहे हैं। एक भी सीट ऐसी नहीं थी जो खाली पड़ी हो। एक सीट पर 4 यात्रियों को टिकट दी गई थी और दो यात्री के बीच में कोई दूरी नहीं थी। चारो यात्रियों के शरीर आपस में सट रहे थे। D1 से लेकर D11 तक तक यही हाल रहा, किसी भी बोगी में सोशल डिस्टेंस नहीं दिखा।
खाकी दिखी, काले कोट वाले गायब
ट्रेन में खाकी वर्दी वाले तो खूब दिखे, लेकिन काले कोट वालों का कोई पता नहीं था। रेल पुलिस के जवान खिड़की के पास बैठे लाेगों को सुरक्षा के लिहाज से अलर्ट करते हुए दिखे लेकिन पटना से लखनऊ तक के सफर में कोई कोई टीटीई टिकट की जांच करने नहीं आया। चेकिंग नहीं होने से रिजर्वेशन टिकट के साथ बिना टिकट वाले यात्री भी यात्रा पूरी कर लिए। पटना से सीवान तक लोकल पैसेंजर्स की काफी भीड़ रही, इसके बाद सीवान देवरिया से लखनऊ तक की यात्रा करने वालों की भीड़ बढ़ गई। गोरखपुर जाते जाते ट्रेन पटना की तरह फिर कोरोना के खतरे में हो गई। गोगियों में भीड़ बढ़ गई और गोरखपुर के बाद भी कोई जांच करने नहीं आया। टिकट की जांच नहीं होने से भीड़ भी कम नहीं हुई।

520 किलोमीटर की यात्रा में एक भी टीटीई का बोगी में नहीं आना बड़ा सवाल है। इतना ही नहीं ट्रेनों में कोरोना की गाइडलाइन का पालन नहीं कराया जाना भी बड़ा खतरा है। अगर ट्रेनों में ऐसे ही मनमानी होती रही है तो सुरक्षा का बड़ा खतरा होगा। एक बोगी में एक भी कोरोना संक्रमित सवार हुआ ताे कोरोना का स्प्रेड होने के बड़ा खतरा होगा। कोरोना काल में सुरक्षा को लेकर रेलवे ने टिकट का दाम बढ़ाया जनरल व्यवस्था को खत्म किया सोशल डिस्टेंस का दावा किया लेकिन भास्कर की पड़ताल में कहीं से कोई गाइडलाइन पालन होती नहीं दिखी। ट्रेन की बोगी से लेकर प्लेटफार्माें तक रेलवे की बड़ी मनमानी दिखी।
रास्ते में जो ट्रेनें मिली उसमें भी भीड़

पाटलिपुत्रा सुपर फास्ट से रास्ते में 6 से अधिक ट्रेने क्रॉसिंग की लेकिन पटना से लेकर लखनऊ के बीच जितनी भी ट्रेन मिली किसी भी ट्रेन में भीड़ से कोरोना की गाइडलाइन का पालन होता नहीं दिखा। बोगियों में भी सीट पर सवार यात्रियों में सोशल डिस्टेंस नहीं दिखा। ट्रेनों में जनरल बोगी खत्म करने के बाद भी कोरोना के संक्रमण का खतरा कम नहीं दिखा। भीड़ से यह साफ दिखा कि रेलवे जनरल बोगी को खत्म करने और किराया बढ़ाने के बाद भी कोरोना से सुरक्षा को लेकर सख्ती नहीं दिखा पा रही है।




Leave a Reply