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आवागमन का संकट / बूढ़ी गंडक उफनाई अहियापुर समेत कई मोहल्लों में घुसा पानी,बकुची पीपा पुल पर चारपहिया वाहनों का परिचालन है बंद

बूढ़ी गंडक नदी के जलस्तर में सिकंदरपुर में उफान जारी रहने से शहर के माेहल्लों के घरों में पानी घुसने लगा है। बूढ़ी गंडक नदी के जलस्तर में गुरुवार को 14 सेमी की बढ़ोतरी होने से अब यह खतरे के निशान से केवल 50 सेमी नीचे है। इसके कारण शहर के झील नगर, सिकंदरपुर, कर्पूरी नगर, आश्रम घाट, चंदवारा के घरों में पानी घुसने लगा है।

इसके साथ ही शेखपुर ढाब के साथ अहियापुर थाना के निकट के मुहल्ले में बूढ़ी गंडक का पानी तेजी से फैल रहा है। इसके अलावा विजय छपरा तथा कांटी के मिठनसराय, कोल्हुआ के माेहल्लाें में पानी प्रवेश करने लगा है। इस बीच, गंडक का जलस्तर रेवा घाट में खतरे के निशान से 1.51 सेमी नीचे है। वहीं, बागमती नदी के जलस्तर में कटौझा में कमी आई है, जबकि बेनीबाद में स्थिर है।

2 किमी आवागमन संकट के चलते 60 किमी अतिरिक्त दूरी तय कर रही बाढ़ प्रभावित कटरा की 2 लाख आबादी

कटरा प्रखंड स्थित बागमती नदी के जलस्तर में गुरुवार को आई गिरावट के बावजूद बकुची पीपा पुल पर चारपहिया वाहनों का परिचालन अब तक प्रारंभ नहीं हो सका है। पीपा पुल के दोनाें छोर का एप्रोच ध्वस्त हो जाने के बाद पीपा पुल संचालकों ने चचरी डालकर किसी तरह पैदल आने-जाने लायक बनाया है, लेकिन स्थिति यह है कि प्रखंड की उत्तरी भाग के पंचायतों में किसी के तबीयत बिगड़ने पर सिंहवार-बिठौली के रास्ते व औराई-रून्नीसैदपुर के रास्ते मुजफ्फरपुर शहर जाना पड़ता है। 2 किमी आवागमन संकट के चलते 60 किमी की अतिरिक्त दूरी कटरा की 2 लाख की आबादी तय कर रही है, जबकि मुजफ्फरपुर शहर से कटरा प्रखंड मुख्यालय की दूरी 28 किमी है। अभी 80-90 किमी की यात्रा कर मुजफ्फरपुर आना पड़ रहा है।

इधर, प्रखंड की उत्तरी बसघट्टा, बर्री, बंधपुरा, तेहवारा, बेलपकौना, खंगुराडीह, पहसौल, चंगेल, कटाई, नगवारा, लखनपुर, यजुआर समेत 14 पंचायत के दो दर्जन से ऊपर गांव की आबादी के समक्ष आवागमन का संकट अब भी बरकरार है। मरीज की गंभीर हालत होने पर कई बार जान भी चली जाती है। बाढ़ के दिनों में यह समस्या 27 वर्षाें से बरकरार है, लेकिन इस पर राजनेताओं से लेकर प्रशासन तक का ध्यान नहीं है। वहीं बसघट्टा डायवर्सन पर भी बाढ़ के दिनाें में चार महीने नावाें का परिचालन पिछले 15 वर्षाें से हाे रहा है, लेकिन आज तक वहां पर पुल नहीं बन सका।

नाव के सहारे बाढ़ के दिनों में प्रखंड की उत्तरी पंचायतों का आवागमन होता है। नाव परिचालन के दौरान प्रतिवर्ष दुर्घटनाएं होती हैं। पिछले वर्ष भी कोचिंग के लौटने के दौरान बसघट्टा के प्रभात शंकर के पुत्र की नाव हादसे में मौत हो गई। घटना से गुस्साए परिजनाें ने सीओ से मुआवजा राशि लेने से भी इनकार किया था।

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