स्कूली शिक्षा (School Education) की गुणवत्ता को मजबूती देने में जुटी केंद्र सरकार ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के मान्यता देने के नियमों (Affiliation Rules) में बड़ा बदलाव किया है। इसके तहत सीबीएसई अब किसी भी नए अभी तक निजी विद्यालय (Private School) को मान्यता उसकी पढ़ाई लिखाई की गुणवत्ता (Learning Outcome) के आधार पर देगी। वहींं अभी तक निजी विद्यालयों के इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) को जांचने का जिम्मा राज्य सरकार के ऊपर सौंप दी है। बिहार में राज्य सरकार अब मनमानी फीस वसूली पर भी नजर रखेगी।


फीस की मनमानी पर भी नजर रखेगी सरकार
सीबीएसई स्कूलों में वसूली जाने वाली मनमानी फीस पर राज्य सरकार नजर रखेगी और जरूरत पड़ी तो ऐसे स्कूलों की मान्यता रद करने की भी कार्रवाई की जाएगी। प्रदेश में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूती देने में जुटी केंद्र सरकार ने सीबीएसई के मान्यता देने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। इसके तहत सीबीएसई अब किसी भी नए निजी विद्यालय स्कूल को मान्यता उसकी पढ़ाई लिखाई की गुणवत्ता के आधार पर देगी। वहीं निजी विद्यालयों के इंफ्रास्ट्रक्चर को जांचने का जिम्मा राज्य सरकार के ऊपर छोड़ा है। इसके लिए स्कूलों को जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना होगा।

शिक्षकों की योग्यता व वेतन की भी जांच होगी
अभी तक निजी विद्यालयों के मान्यता देने की प्रक्रिया के तहत सीबीएसई और राज्य दोनों ही इंफ्रास्ट्रक्चर की जांच करते थे। ऐसे में इस पूरी प्रक्रिया में विलंब होता था। जबकि, पढ़ाई-लिखाई की गुणवत्ता को परखने की ओर ध्यान कम था। लेकिन नए नियमों के तहत सीबीएसई अब सिर्फ स्कूलों के लर्निंग आऊटकम पर ही फोकस करेगा। इस दौरान वह स्कूलों में शिक्षकों की योग्यता, उनके प्रशिक्षण, वेतन और प्रयोगशाला आदि की जांच पड़ताल करेगा। साथ ही स्कूलों में पढ़ रहे छात्रों की योग्यता को भी परखेगा। यानी वह जिस कक्षा में पढ़ रहे है, उसका पाठ उन्हेंं आता है या नहीं, यह देखेगा। मौजूदा समय में सीबीएसई से संबंद्ध प्रदेश भर में करीब 10,283 निजी विद्यालय है।

बिहार के शिक्षा मंत्री ने क्या कहा, जानिए
इस बाबत बिहार के शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी (Bihar Education Minister Vijay Kumar Chaudhary) कहते हैं कि केंद्र सरकार ने निजी विद्यालयों में आधारभूत संरचना की जांच और फिर जिला शिक्षा अधिकारी से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने का मानदंड तय किया गया है। पहली से आठवीं कक्षा तक के निजी प्रारंभिक विद्यालयों को 31 दिसंबर तक अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया है। बिना अनुमति के अब ऐसे निजी विद्यालय संचालन नहीं होगा। अनुमति प्राप्त करने हेतु निजी विद्यालयों के आवेदन करने और फिर इसके तेजी से निराकरण को लेकर इस पूरी व्यवस्था को आनलाइन कर दिया गया है।




Leave a Reply