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विलुप्त हो रहे गिद्धों के संरक्षण करने का काम करेगा VTR प्रशासन, इस वर्ष सरकार को भेजी वार्षिक कार्ययोजना में किया शामिल

वीटीआर प्रशासन विलुप्त होते गिद्धों के संरक्षण करने का काम करेगा। सूबे में पहली बार इसके संरक्षण एवं संवर्द्ध्न की दिशा में पहल की जा रही है। इसके लिए वीटीआर प्रशासन ने सरकार को इस वर्ष भेजी गई वार्षिक कार्ययोजना में इसे शामिल किया है। इसकी स्वीकृति मिलने के बाद इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। विलुप्त हो रहे गिद्ध VTR के कुछ स्थानों पर देखे जा रहे हैं। गिद्ध विलुप्त प्रजाति की श्रेणी में पहले से ही शामिल है। गिद्धों के सरंक्षण के लिए गोनौली वन प्रक्षेत्र के कंपार्टमेंट संख्या 22 में गिद्धों के लिए रेस्क्यू सेंटर बनाए जाने का प्रस्ताव है। इसमें गिद्धों की संख्या में बढ़ोत्तरी के लिए उपाय अख्तियार किए जाएंगे। ताकि इस क्षेत्र में सुरक्षित ढ़ंग से इस प्रजाति का अधिवास हो सके।

वन संरक्षक सह क्षेत्र निदेशक हेमकांत राय ने बताया कि वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में गिद्ध की चार प्रजातियां मिलती है। यह वातावरण के सफाईकर्मी के रूप में जाना जाता है, क्योंकि यह मरे हुए पशुओं को खाकर वातावरण को स्वच्छ रखता है। गिद्ध संरक्षण परियोजना पर पांच प्रक्षेत्रों में काम किया जाएगा। इसमें मदनपुर, मंगुराजा, ठोरी व गोनौली के दो प्रक्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने बताया कि गिद्धों की संख्या बढ़ाने के लिए उनके अंडे को संरक्षित किया जाएगा। इसके लिए दूसरे राज्यों से पक्षी वैज्ञानिकों को की सलाह ली जाएगी।

गिद्धों के विलुप्त होने का कारण

पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ एस वी रंजन ने बताया कि पशुओं में दर्द की दवा के रूप में डायक्लोफेनिक का इस्तेमाल किया जाना गिद्धों की संख्या में गिरावट का मुख्य कारण रहा है। हालांकि सरकार ने इसे पूर्णता प्रतिबंध कर दिया है। पशु चिकित्सक अब इस दवा का प्रयोग नहीं कर रहे हैं। लेकिन पहले इस दवा के प्रयोग से गिद्धो पर इसका प्रभाव पड़ा है। यह दवा पशुओं पर भी समान रूप से प्रभावी होती है और जब कामकाजी पशुओं को इसे दिया जाता है तो उनके जोड़ों का दर्द कम हो जाता है और उन्हें अधिक समय तक कामकाजी बनाए रखता है। इसलिए पशुओं में दर्द निवारक के तौर पर डिक्लोफेनाक का बड़े पैमाने पर प्रयोग भारत में गिद्धों की संख्या को गिराने का वजह है। डाइक्लोफिनेक सोडियम गिद्धों के शरीर में खाद्य श्रृंखला के माध्यम से प्रवेश करता है। जहां यह एस्ट्रोजन हार्मोन की गतिविधि को प्रभावित करता है, परिणामस्वरूप अंड कोश कमजोर हो जाता है। इससे अंडों की असामयिक सोने की प्रक्रिया होती है जिससे भ्रूण की मौत हो जाती है।

ग्रामीणों को किया जाएगा जागरूक

वन संरक्षक ने बताया कि गिद्धों के संरक्षण के लिए आसपास के ग्रामीणों को इस बात को लेकर जागरूक किया जाएगा। ग्रामीणों से गिद्ध से होने वाले फायदे के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही लोग को पालतू पशुओं को दफनाने के लिए जागरूक किया जाएगा। लोगों को यह बताया जाएगा कि यह पक्षी पर्यावरण प्रहरी के रूप में है। इसे बचाने के लिए फसलों में कीटनाशी दवाओं के साथ -साथ पशुओं को प्रतिबंधित दवाएं नहीं दें।

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