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18 महीने बाद गुलजार हुआ भारत-नेपाल सीमा, सीमांचल के लोगों के खिल उठे चेरहे, रोजगार का भी खुला द्वार

कोरोना को लेकर 18 माह से बंद नेपाल सीमा से होकर पुन: अवागमन शुरू किए जाने से नेपाल में काम कर रहे मजदूरों में खुशी देखी जा रही है। इससे पूर्व नेपाल में काम करने वाले मजदूरों को नेपाल जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इस कारण उन्हें आर्थिक मार के साथ बेरोजगारी झेलनी पड़ रही थी। लेकिन मुख्य सीमा से होकर अवागमन सुचारू होते ही उनके चेहरे खिल उठे हैं। यही हाल सीमावर्ती दोनों ओर के बाजारों की है।जो कोरोना के समय से करीब करीब बंद था। लेकिन सीमा के खुलने के साथ ही सबों के चेहरे पर पुन: रौनक लौट आयी है।

-चंपारण, मधुबनी और सीतामढ़ी को अभी भी है इंतजार

-नेपाल में आर्थिक बदहाली झेल रहे होटल व

अस्पताल व्यवसाय को मिली संजीवनी

-सीमा बंद रहने मजदूर और मील संचालक झेल रहे थे आर्थिक मार

-सीमा खुलने की सूचना पर नेपाल जाने वालो का उमडा सैलाब

 इधर सीमा खुलने की सूचना फैलते ही सीमा होकर नेपाल जाने वालों का जनसैलाब उमड पड़ा जिसमें कुछ आंखों के अस्पताल जाने वाले थे तो अधिकांश अपने रिश्तेदारों से मिलने वाले कोरोना संक्रमण को लेकर 18माह से बंद ने सीमाई इलाकों के लोगों की कमर तोड़ दिया है। सीमा क्षेत्र के अधिकांश लोग रोजगार के लिए पूर्णतया नेपाल पर ही आश्रित है चाहे वहां ये मील में काम करते हो या फिर अन्य रोजगार तथा नेपाल के मील व फैक्टरी की भी सीमा बंद रहे से इनकी कमर तोड दिया एवं अन्य व्यवसाय बंद रहने से इनसे जीवनयापन करने वाले लोग बेरोजगार बैठे थे।जिस कारण इनके सामने रोजीरोटी की समस्या उत्पन्न हो गई थी।

विगत 18 माह से नेपाल सीमा बंद थी लेकिन अन्य खुली सीमा होकर हाल के दो महीने में ऐसे लोग रोजगार के लिए जाते थे। जिसमें इन्हें पुलिस प्रशासन के कोपभाजन भी होना पडता था लेकिन सीमा के खुल जाने से इसने चेहरे पर मुस्कान लौट आयी है। इस संबंध में नेपाल के मील में काम कर रहे दीपक राय ने कहा कि लाकडाउन के कारण हमलोगों को नेपाल जाने नहीं दिया जा रहा था।ऐसे में काम पर नहीं जाएगें तो पैसा नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि हमलोग नित्य कमाते हैं और घर का खर्च चलाते हैं ऐसे में हमलोगों के सामने भूखे मरने की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। लेकिन सीमा खुलने से हमलोगों में खुशी है।

नेपाल के रेडिमेड व्यवसायी रवि गुप्ता रौनियार ने कहा कि सीमा बंद रहने से पडोसी देश के ग्राहकों के नहीं आने से व्यवसाय बंद की स्थिति में थी क्योंकि नेपाल का सीमावर्ती बाजार पूर्णता भारतीय ग्राहकों पर निर्भर है चाहे वह रेडिमेड, इलेक्ट्रानिक या फिर अस्पताल व्यवसाय हो सभी की स्थिति सीमा बंद रहने के कारण चरमरा गई थी लेकिन इसमें अब जान आ गया है।

इस संबंध में जोगबनी व्यापार संघ के उपाध्यक्ष मंटू भगत ने बताया कि सीमावर्ती दोनों ओर के बाजार एक दूसरे पर निर्भर है।एक ओर जहां कपडा, चीनी व रेडिमेड के लिए ग्राहक जोगबनी आते हैं तो दूसरी ओर आंख अस्पताल, इलक्ट्रोनिक व अन्य सामानों की खरीददारी लोग नेपाल में करते हैं। सीमा बंद रहने से दोनों ओर की व्यवसाय प्रभावित हुआ है।

इस सबंध में जोगबनी नगर परिषद के अध्यक्ष प्रतिनिधि राजू राय ने सीमा खोले जाने पर नेपाल सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि सीमावर्ती दोनों ओर रिश्तेदारी एवं एक दूसरे के सहयोगी है इसलिए दोनों को एक साथ कदम मिलाकर चलना ही बुद्धिमानी है।

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