इन दिनों स्मार्ट सिटी में हर तरफ पानी ही पानी है। बारिश के पानी में शहर तैर रहा है। मुख्य सड़कें दरिया तो गली-मोहल्ले टापू बन गए हैं। घर से लेकर दुकानों में पानी प्रवेश कर गया है। इससे लोगों का जीना मुहाल हो गया है। शहरवासी त्राहिमाम कर रहे हैं। कई इलाके में तो एक माह से अधिक से जलजमाव है। लगातार हो रही बारिश ने उन इलाकों में रहने वाले लोगों की पीड़ा और बढ़ा दी है। महिलाएं और बच्चे घरों में कैद हैं। संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। लोग चर्म रोग से ग्रसित हो रहे हैं। जलनिकासी के नाम पर सफाई महकमा व संबंधित एजेंसी ने पूरे शहर के नाले को खोदकर छोड़ दिया है। इस वजह से पानी की निकासी नहीं हो रही। पानी की तरह पैसा बह रहा है। कर्मी सिर्फ लाठी पीट रहे हैं।
शहर को स्मार्ट सिटी घोषित हुए चार वर्ष से अधिक गुजर गए। अब तक कोई योजना पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर सकी। इन दिनों इसके कार्यान्वयन में कुछ तेजी जरूर आई है। अब भी लोग जलजमाव व जाम की पीड़ा झेल रहे हैं। सड़क किनारे डंप कचरे के दुर्गंध से उनका राह चलना मुश्किल हो जाता है। शहर में खुले स्लैब भी खतरनाक साबित हो रहे। आए दिन खुले नाले व स्लैब में गिरकर लोग असमय काल के गाल में समा जा रहे। जर्जर सड़कें हर दिन लोगों को नया जख्म दे रही हैं। सड़क पर बने गड्ढे में गिरकर लोग अस्पताल पहुंच जा रहे। इसे देखने वाला कोई नहीं है।नेताजी से लेकर सफाई महकमे के आका व संबंधित एजेंसी के साहब के बड़े-बड़े दावे सिर्फ कागज पर ही हैं। जनता पूछ रही आखिर कब स्मार्ट सिटी बनेगा?


इलाज के बदले कर देते रेफर
जिले में स्वास्थ्य महकमा की बात ही निराली है। महकमे के साहब इलाज की व्यवस्था को लेकर हमेशा स्वस्थ बातें करते हैं। कहने को तो यहां अत्याधुनिक मशीनें लग गई हैं। नए-नए भवन भी बन गए हैं। शहर स्थित एक बड़े सरकारी अस्पताल में आज भी पुरानी व्यवस्था ही कायम है। यहां रेफर प्रणाली आबाद है। शाम को आने वाली प्रसूता को भर्ती करने के बजाय दूसरे अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। रात में दूर-दराज से आने वाले मरीज व स्वजनों की पीड़ा के बारे में तो पूछिए ही मत। इसे देखने वाला कोई नहीं। शिकायत करने पर दोषी के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दे दिया जाता। कर्मी से लेकर चिकित्सक तक ड्यूटी से गायब रहने का बहाना ढूढ़ते रहते। अभी अस्पताल परिसर में जलजमाव है। कई कर्मी व साहब नहीं आ रहे। मरीज बिना इलाज ही लौट जाते। यह देख लोग कह रहे यहां की व्यवस्था नहीं बदलने वाली। यह ऐसे ही चलेगा।


बिना मास्क निकल रहे लोग
कोरोना संक्रमण का खतरा अभी टला नहीं है। विशेषज्ञ भी तीसरी लहर की संभावना को लेकर सतर्क कर रहे। फिर भी लोग नहीं मान रहे। जिले में संक्रमण कम होने के साथ ही लोगों ने लापरवाही बरतनी शुरू कर दी है। वे कोविड नियमों का पालन नहीं कर रहे। घरों से बिना मास्क के ही निकल जा रहे। दुकानों में भी बिना मास्क के खरीदारी को पहुंच जा रहे। शारीरिक दूरी का भी पालन नहीं किया जा रहा। बेवजह चौक-चौराहों व हाट-बाजारों में लोगों की भीड़ एकत्रित हो रही। आटो व बसों में जरूरत से ज्यादा यात्रियों को बैठाया जा रहा। निर्धारित मापदंड का पालन नहीं होता। गाडिय़ों को सैनिटाइज भी नहीं किया जाता। नियम तोडऩे वालों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूरी हो रही। नियम पालन करने वाले कह रहे अभी वक्त सतर्क रहने का है। खुद और दूसरों को बचाने का है। मास्क कोरोना से बचाव का बड़ा हथियार है।





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