गायघाट बीडीओ की मनमानी से ग्राम कचहरी के सचिव और न्याय मित्र परेशान
मुजफ्फरपुर, ( विशेष संवाददाता )। गायघाट प्रखण्ड के बीडीओ डाॅ. विमल कुमार की मनमानी से प्रखंड में स्थित तमाम ग्राम कचहरियों के सचिव के साथ न्यायमित्र त्रस्त हो गए हैं । बीडीओ को ग्राम कचहरी के रूल -रेगुलेशन की रत्ती भर भी जानकारी नहीं है । जिसके कारण सचिव और न्यायमित्र परेशान रहते हैं ।
हरिपुर दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति के अध्यक्ष पद का चुनाव होने वाला है और इसके लिए ग्राम कचहरियों के तमाम सचिवों को प्रखंड में आज बुलाया गया है जबकि ग्राम कचहरी में एक ही सचिव का पद है । ऐसी स्थिति में ग्राम कचहरी का कार्य कौन देखेगा । सचिव को कभी बीएलओ का काम दे दिया जाता है तो कभी फसल क्षति पर किसानों को मिलने वाले मुआवजे के काम में लगा दिया जाता है । ऐसी स्थिति में ग्राम कचहरी का काम कैसे होगा, इस पर विचार नहीं किया जाता ।इतना ही नहीं, राजीव, राजेश, सोनू जैसे ग्राम कचहरी के सचिव से प्रखंड मुख्यालय में नाजायज क्लर्क का काम लिया गया और कुछ से काम लिया जा रहा है । ऐसी स्थिति में संबंधित ग्राम कचहरी का काम ठप होना लाजिमी है । इन बातों के लिए सीधे तौर पर बीडीओ ही जिम्मेदार हैं । बीडीओ ग्राम कचहरी को पंगु बनाने पर लगा है ।नवपदास्थापित क्लर्क शेखर जी को प्रत्येक न्यायमित्र से पेमेंट के डाक्यूमेंट जिला पंचायतीराज कार्यालय को भेजने के लिए पांच सौ रुपया चाहिए अन्यथा डाक्यूमेंट वे नहीं भेजेंगे । इस तरह पेमेंट का मामला अटका पड़ा है और बीडीओ साहब चैन की बंशी बजाने में लगे हैं ।
महत्वपूर्ण बात यह है कि ग्राम कचहरी के सचिव और न्याय मित्र का सितंबर 2020 से मानदेय और फीस बकाया है । सरकार ने फंड भी आवंटित कर रखा है । सचिव और न्याय मित्रों का अबसेंटी भी प्रखंड में जमा है लेकिन बीडीओ की मनमानी के कारण इसकी सूचना जिला पंचायतीराज कार्यालय को अभी तक नहीं भेजी गई है, जिसके कारण सभी का पेमेंट अटका हुआ है । दूसरी ओर इस माह में पंचायत चुनाव की घोषणा भी होने वाली है । बीडीओ को और पंचायतीराज पदाधिकारी को इस बात की तनिक भी चिंता नहीं कि ग्राम कचहरी के सचिव और न्याय मित्र क्या हवा पी कर रहते हैं । उनके भी परिवार हैं । पेमेंट नहीं मिलने से उनके परिवार के साथ क्या बीतता होगा ।








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