मुजफ्फरपुर जिले में सड़क हादसों में गंभीर रूप से घा’यल हुए मरीजों को इधर-उधर या निजी अस्पतालों के चक्कर का’टने नहीं पड़ेंगे। सदर अस्पताल में वैसे मरीजों का इलाज होगा। अस्पताल में पांच बेड का ट्रामा सेंटर बनाया जाएगा। जिसमे मरीजों की जान बचाने के लिए सभी जरूरी संसाधन मौजूद होंगे। इसे इमरजेंसी वार्ड में बनाया जाएगा। जहां CT स्कैन, XRAY समेत डॉयग्नोस्टिक मशीनें उपलब्ध रहेंगी। इस संबंध में प्रधान सचिव ने सिविल सर्जन को निर्देश दिया है।


ब्लड बैंक की भी है व्यवस्था
प्रधान सचिव ने कहा है कि अस्पताल में जब सभी प्रकार के संसाधन उपलब्ध हैं तो ट्रामा सेंटर को भी अविलम्ब चालू करें। अस्पताल में पहले से ब्लड बैंक भी है। इसलिए, मरीजों को दूर भागने की ज़रूरत नहीं होगी। क्योंकि सड़क हादसे में अक्सर घायलों में खून की कमी हो जाती है। अधिकांश केसों में मरीज को खून चढ़ाने की आवश्यकता होती है। ब्लड बैंक सदर अस्पताल में पहले से चालू है। इसलिए मरीजों को खून की दिक्कत नहीं होगी। ट्रामा सेंटर बनने के बाद न्यूरोसर्जन, रेडियोलाजिस्ट, एनेस्थिसिया एक्सपर्ट समेत विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती होगी। इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी ट्रामा सेंटर में उपलब्ध रहेंगे।
NHAI अपनी वाहन से घायलों को पहुंचाएगा अस्पताल
हाईवे पर अक्सर सड़क हादसे के लोग शिकार होते हैं। कई घटनाओं में घायलों को सही समय पर वाहन नहीं मिल पाता है। जिससे अस्पताल पहुंचने में देरी हो जाती है। इससे मरीज़ों की जान पर बन जाता है। इसके लिए NHAI का पेट्रोलिग दस्ता अपने एंबुलेंस से घायलों को सदर अस्पताल पहुंचाएगा। अस्पताल में ऑटोमेटिक बेड के अलावा पांच वेंटिलेटर, पांच कॉर्डियो मॉनिटर की सुविधा भी रहेगी।
आपातकालीन सेवा से होगी शुरुआत
सिविल सर्जन डॉ. विनय शर्मा ने कहा कि ट्रामा सेंटर में फिलहाल आपातकालीन सेवा से शुरुआत की जाएगी। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अलावा अन्य संसाधनों की कमी को दूर कराने के लिए वरीय अधिकारियों से मांग की जाएगी। उनकी तैनाती के बाद यह पूर्ण रूप से काम करने लगेगा।




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