बिहार के वाल्मीेकिनगर टाइगर रिजर्व (VTR) से भटके बाघ (Tiger) आसपास के इला’कों में परे’शानी का सबब बनते रहे हैं। लेकिन अब उनकी ड्रोन (Drone) से ट्रैकिंग की तैयारी जा रही है। इससे भटके बाघों की खोज एवं उन्हें वीटीआर में वापस लाना आसान हो जाएगा। दिन हो या रात, जाड़ा हो या गर्मी, इससे बाघों पर आसानी से नजर रखी जा सकेगी। रात में नजर रखने के लिए ड्रोन में नाइट विजन कैमरे (Night Vision Camera) भी लगे रहेंगे। पहले चरण में वीटीआर प्रशासन ने दो ड्रोन की खरीदारी की है।बीते दो वर्ष के दौ’रान वीटीआर से बाघों का भटकाव बढ़ा है। बाघ खेतों से लेकर रिहायशी इला’के तक पहुंच रहे हैं। वे कई लोगों पर ह’मला कर घाय’ल कर चुके हैं।

कई बकरियों, भैंस और बछड़े का शि’कार कर चुके हैं। इसके चलते वीटीआर के आसपास के गांवों जमौली, सिसई, मुंगराहा, शेरपुर, मनीटोला, मटिअरिया और गोवर्धना सहित आसपास के अन्य क्षेत्रों में दह’शत का माहौल है। इसे देखते हुए बाघों पर नजर रखने और वीटीआर में लौटाने के लिए ड्रोन का सहारा लेने का निर्णय लिया गया।इसे देखते हुए बाधों की गतिविधियों की निगरानी के लिए तीन-तीन लाख रुपये मतें में दो ड्रोन की खरीदारी की गई है। ये ड्रोन 50 मीटर की ऊंचाई पर उड़कर आसपास के इ’लाके में बाघों की उपस्थिति से संबंधित आंकड़े जु’टाएंगे। अगर बाघ जंगल से बाहर आते हैं तो इसके जरिए पहले से जानकारी मिल सकेगी।

उन्हें वापस भेजा जा सकेगा। जान-माल का नु’कसान कम किया जा सकेगा।जानकार बताते हैं कि अन्य नेशनल पार्कों से भी बाघों एवं अन्य वन्य प्राणियों का भ’टकाव होते रहता है, लेकिन वीटीआर में इसमें ज्यादा इजाफा हुआ है। इसका मुख्य कारण आसपास गन्ने के खेत होना है, जिनमें बाघ आसानी से छिप जाते हैं। करीब तीन सप्ताह पहले ही नरकटियागंज शहर से सात किलोमीटर दूर एक बाघ गन्ने के खेत में डेरा डाले मिला था।




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