राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा ऑनलाइन दाखिल-खारिज आवेदन करने के लिए बने सॉफ्टवेयर में सुधार किया गया है। साथ ही जमाबंदी देखने में हो रही परेशानी को भी दूर कर लिया गया है। इसके अलावा ऑनलाइन सेवाएं देने के लिए बनाई गई वेबसाइट http://biharbhumi.bihar.gov.in को नए कलेवर और नए डिजाइन के साथ प्रस्तुत किया गया है। कई सारी खूबियों के साथ इसे राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री रामसूरत कुमार द्वारा अपने कार्यालय कक्ष में डिजिटली लांच किया गया। अब इसे मोबाइल से इस्तेमाल करने लायक बना दिया गया है।
फोन से अपटेड स्थिति जान सकते हैं
वहीं biharbhumi.bihar.gov.in वेबसाइट को नए रुप में लांच करते हुए विभाग के मंत्री रामसूरत कुमार ने कहा कि दाखिल-खारिज, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की सबसे महत्वपूर्ण सेवा है, जो हम राज्य के आम नागरिकों को उपलब्ध करा रहे हैं। इस सेवा की कार्य कुशलता और उपादेयता बढ़ने से निश्चित रुप से विभाग के प्रति लोगों की अच्छी धारणा बनेगी। वेबसाइट की दिक्कतों को दूर करने के साथ ही अब इसे मोबाइल से इस्तेमाल करने लायक भी बना दिया गया है। यानी अब आसानी से कोई भी रैयत अपने मोबाइल से आवेदन कर सकता है और अपने काम की प्रगति को अपने फोन के जरिए पता कर सकता है।
लोगों को परेशानी न हो इस पर फोकस
विभाग के अपर मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह ने कहा कि ease of doing business आज के काम-काज का मूल मंत्र है। हमारी सफलता इसी में है कि आम जनता का काम बगैर किसी परेशानी और भाग-दौड़ के हो जाएं। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की यह कोशिश है कि इसी दिशा में एक अहम कोशिश है। हम आगे भी अपने अनुभवों से सीखेंगे और विभाग को और पीपुल फ्रेंडली बनाने की कोशिश जारी रखेंगे।

2017 में ऑनलाइन दाखिल-खारिज सेवा की शुरुआत के साथ ही इस सॉफ्टवेयर में कई तरह के बदलाव की जरुरत महसूस की जा रही थी। वेबसाइट की धीमी रफ्तार से काम करने और म्यूटेशन के दस्तावेजों की अपलोडिंग में अनावश्यक देरी होने की शिकायत आ रही थी। आवेदन को ट्रैक करने में भी काफी समय लग रहा था। स्क्रीन को भी और अधिक वाइबै्रंट बनाने की जरूरत थी। एनआईसी ने इन सभी शिकायतों पर गौर करते हुए सॉफ्टवेयर में आवश्यक सुधार कर दिया।
ऑनलाइन दाखिल-खारिज के लिए सॉफ्टवेयर बनाने से लेकर उसके रख-रखाव का काम देखने वाली भारत सरकार की एजेंसी एनआईसी के राज्य सूचना विज्ञान पदाधिकारी राजेश कुमार सिंह ने बताया कि शुरू में इस सॉफ्टवेयर को झारखंड से लिया गया था। लेकिन धीरे-धीरे उसमें बिहार की जरुरतों के हिसाब से आवश्यक बदलाव और सुधार किए गए और उसे परिष्कृत कर दिया गया है। यानी अब इसे पूरी तरह से राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के लिए कस्टमाइज्ड कर दिया गया है।



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