कोरोना काल में ICU में एक बेड की व्यवस्था नहीं हो पा रही थी। सरकारी से लेकर प्राइवेट अस्पतालों में ICU के लिए नो एंट्री रहती थी। वेंटिलेटर के लिए तो वेटिंग चलती थी। एक की मौत होते ही दूसरा वेंटिलेटर पर आ जाता था। कोई वेंटिलेटर के लिए तड़प रहा था तो कोई ICU बेड नहीं मिलने से जिंदगी की जंग हार रहा था। कोरोना की दूसरी लहर में इस दर्दनाक मंजर को जिम्मेदार भूल गए हैं, लेकिन जनता नहीं भूली है। स्वास्थ्य मंत्री ने विधानसभा में बोल दिया कि संसाधन की कमी से कोई मौत नहीं हुई, लेकिन सच तो यह है कि सरकार वेंटिलेटर चलाने वालों की भर्ती नहीं कर पाई, जिससे दर्जनों वेंटिलेटर की आज तक पैकिंग ही नहीं खुली।
बिहार में मौत के 5 कारण
बिहार में कोरोना काल में मौत के पांच कारण है। 5 समस्या को लेकर जनता तड़पती रही और उन्हें राहत नहीं मिली। दैनिक भास्कर कोरोना काल में इस समस्या को प्रमुखता से उठाया और यह दर्द भी सरकार तक पहुंचाया था कि किस तरह से लोग व्यवस्था से परेशान होकर जान गंवा रहे हैं। आज हम वह पांच कारण बताने जा रहे हैं जो कोरोना काल में जान पर भारी पड़ी है।

कारण 1: अस्पतालों में ICU बेड की कमी
अस्पतालों में ICU बेड की भारी कमी थी। ऑक्सीजन वाले बेड भी बहुत मुश्किल से मिल रहे थे। कोरोना जब पीक पर था तो प्रशसनिक अफसर भी मरीजों को एडमिट कराने के लिए प्राइवेट अस्पतालों में जुगाड़ लगा रहे थे। सरकारी अस्पतालों में ICU बेड नहीं होने से मरीजों को प्राइवेट की तरफ भागना पड़ता था। प्राइवेट अस्पताल भी या तो फुल होते थे या फिर मोटी रकम वसूलते थे। पटना के राजीव नगर के रहने वाले सोशल वर्कर विवेक विश्वास बताते हैं कि वह दौर याद कर दिल दहल जाता है। फोन करके लोग ICU बेड के लिए जुगाड़ लगाने को बोलते थे और हम व्यवस्था नहीं करा पाते थे।

कारण 2: ऑक्सीजन के लिए हाहाकार
कोरोना के पीक पर होते ही ऑक्सीजन को लेकर हाहाकार मच गया था। सरकारी अस्पतालों से लेकर प्राइवेट अस्पतालों में मारामारी मची थी। होम आइसोलेशन में दम फूल रहे लोगों को भी सरकार की तरफ से ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं हो पा रही थी। प्राइवेट अस्पतालों को टोकन सिस्टम से ऑक्सीजन दिए जा रहे थे। मरीजों को ऑक्सीजन नहीं होने के कारण भर्ती नहीं किया जा रहा था। एक एक सांस के लिए सौदा हो रहा था। सरकार से गुहार लगाकर लोग थक गए थे, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जात रहा था। ऑक्सीजन की व्यवस्था सरकार नहीं करा पा रही थी जिससे अस्पतालों से लेकर होम आइसोलेशन में रह रहे लोगों को मदद मिल सके।
कारण 3: अस्पतालों में वेंटिलेटर की कमी
कोरोना काल में सबसे बड़ी सतमस्या वेंटिलेटरको लेकर रही। सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर को लेकर कोई तैयारी नहीं की गई थी। कोरोना की पहली लहर के बाद भी समय था लेकिन सरकार ने इस दिशा में कोई काम नहीं किया। इसका प्रमाण इस बात से है कि दूसरी लहर में कोरोना पीक पर था तब राज्य के कई जिलों में PM केयर फंड से आए वेंटिलेटर की पैकिंग तक नहीं खोली गई थी। आलम यह था कि राज्य सरकार को बंद पड़े वेंटिलेटर को किराए पर प्राइवेट हॉस्पिटलों को देना पड़ा। इसके लिए राज्य स्वास्थ्य समिति की तरफ से पत्र जारी किया गया था। ऐसा इसलिए किया गया था सरकार के पास वेंटिलेटर चलाने वालों की व्यवस्था नहीं थी।

कारण 4: एंबुलेंस की कमी
मौत का बड़ा कारण एंबुलेंस की कमी रही। एंबुलेंस की कमी के कारण भी मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने में समस्या जान पर बनी है। बिहार में लगभग 1150 एंबुलेंस 102 की सेवा में है और मरीजों की संख्या इससे कई गुणा अधिक रही। लॉक डाउन के कारण साधन भी नहीं था कि लोग खुद से अस्पताल पहुंच जाए। ऐसी स्थिति में सबसे बड़ी समस्या उन लोगों को हुई जो आर्थिक रूप से परेशान थे और उनके पास सरकारी एंबुलेंस का सहारा था। सरकारी एंबुलेंस की कमी को लेकर प्राइेवट एंबुलेंस ने खूब मनमाना वसूली भी की है। स्वास्थ्य विभाग खुद मानता है कि कोरोना की दूसरी लहर में कई ऐसी मौत हुई है जो अस्पताल जाते समय रास्ते में हुई है।
कारण 5: रेमडेसिवीर इंजेक्शन की कमी
कोरोना की दूसरी लहर में रेमडेसिवीर इंजेक्शन की डिमांड बढ़ गई थी, लेकिन सरकार इसकी उपलब्धता कराने में फेल रही। शुरुआती दौर में मरीजों को ब्लैक में इंजेक्शन खरीदना पड़ा था। परिवार वाले इंजेक्शन के लिए इधर उधर भटक रहे थे। इंजेक्शन की कालाबाजारी भी सामने आई, छापेमारी में इसकी पुष्टि भी हुई लेकिन मरीजों को इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा था। कई बार व्यवस्था बदली गई लेकिन समस्या दूर नहीं हुई। कालाबाजारी का हाल तो प्रशासन की छापेमारी में भी पता चला लेकिन सरकार खामोश रही।
Input : DainikBhaskar



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