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मुजफ्फरपुर: कोरोना के नाम पर बहाल 63 गार्ड, 12 सुपरवाइजर और 25 ट्राली मैन को हटाने की कवायद

कोरोना काल में सीधी बहाली के बाद आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से बहाल 63 गार्ड, 12 सुपरवाइजर और 25 ट्राली मैन व इसके तीन सुपरवाइजर को हटाने की अनुशंसा उपाधीक्षक डा.एनके चौधरी ने की है। सिविल सर्जन की नाराजगी के बाद उपाधीक्षक ने कहा कि अभी इनकी जरूरत नहीं है। 

अधूरी रिपोर्ट पर सीएस ने उठाए सवाल

सिविल सर्जन डा.विनय कुमार शर्मा ने बताया कि सदर अस्पताल उपाधीक्षक की रिपोर्ट में केवल मानव बल एजेंसी की ही जानकारी दी गई। यह नहीं बताया गया कि मानव बल से कोरोना काल में कहां पर काम लिया गया और कहां पर कितने दिनों तक तैनात रहे। इसका रोस्टर नहीं मिला है। सीएस ने कहा कि रोस्टर से ही सही जानकारी मिल पाएगी। उपाधीक्षक से काम का रोस्टर मांगा गया है ताकि इस पर जल्द निर्णय लिया जा सके।

ऐसे चला मानव बल रखने का खेल

सिविल सर्जन को जानकारी मिली कि बड़ी संख्या में सिक्योरिटी गार्ड और ट्राली मैन को सदर अस्पताल में काम पर रखा गया है। कोरोना की पहली लहर व उससे पहले 20 गार्ड व दो सुपरवाइजर से काम चल रहा था। इस पर सीएस ने तीनों शिफ्टों का रोस्टर, नियोजन करने का अधिकारी का निर्देश और एक्स आर्मी मैन का सर्टिफिकेट समेत अन्य कागजात मांगे थे। छानबीन शुरू हुई तो पता चला कि उपाधीक्षक ने एक पर्ची पर सौ सिक्योरिटी गार्ड और 37 ट्राली मैन रखने की मांग सिविल सर्जन से की थी। इसके बाद तत्कालीन सिविल सर्जन ने उपाधीक्षक के पत्र का हवाला देते हुए गोस्वामी सिक्योरिटी एजेंसी से 66 गार्ड, नौ सुपरवाइजर, 25 महिला ट्राली मैन और तीन ट्राली मैन सुपरवाइजर को मंगा लिया। इन्हें सदर अस्पताल के विभिन्न कार्यालयों में रखने का निर्देश दिया।

26 अप्रैल को गार्ड और 27 अप्रैल को ट्राली मैन रखने का तत्कालीन सिविल सर्जन ने निर्देश जारी किया। इसके बाद 28 अप्रैल से गोस्वामी सिक्योरिटी एजेंसी ने गार्ड और ट्राली मैन सदर अस्पताल में तैनात कर दिए। इसके लिए किसी भी वरीय अधिकारी या मुख्यालय से इसका निर्देश नहीं मिला है। सीएस डा.शर्मा ने बताया कि नियम के विपरीत कोई काम नहीं होगा। रिपोर्ट से संतुष्ट होने व नियमसंगत होने के बाद ही मानव बल का भुगतान होगा।

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