कोरोना की दूसरी लहर ने बिहार में तबा’ही मचा दी थी। कई जगह ऑक्सीजन की कमी थी। इसके बावजूद मंगलवार को बिहार सरकार ने विधान परिषद में दावा किया कि बिहार में ऑक्सीजन की कमी से एक भी कोरोना संक्रमित की मौ’त नहीं हुई है।
कांग्रेस के MLC प्रेमचंद्र मिश्रा के सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि राज्य में किसी भी मरीज की मौत ऑक्सीजन और उपकरणों की कमी या रोग की गंभीरता पहचानने में त्रुटि से नहीं हुई है। राज्य के सभी चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल में लिक्विड मेडिकल स्टोरेज टैंक की स्थापना की जा रही है। सभी चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल, सभी सदर अस्पताल, सभी संचालित अनुमंडलीय अस्पताल और कतिपय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मेडिकल गैस पाइपलाइन सहित प्रेशर ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना की जा रही है।

उन्होंने कहा कि बीएमएसआईसीएल के जरिए सभी जिला अस्पतालों का 10924 बी. टाइप ऑक्सीजन सिलेंडर, 3696 डी टाइप ऑक्सीजन सिलेंडर और 6183 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध कराए गए हैं।
MLC मिश्रा ने सवाल पूछा था कि कोरोना की दूसरी लहर में बड़ी संख्या में मरीजों की मौत ICU में इंफेक्शन की वजह से हुई है। अधिक मौतों की वजह ऑक्सीजन की कमी और रोग की गंभीरता पहचान कर तत्काल आईसीयू-वेंटिलेटर मुहैया कराने में विफलता भी रही। सरकार ने मौतों को छिपाने के लिए लाशों को गंगा में फेंका और बड़ी संख्या में लोगों की मौत ऑक्सीजन की कमी की वजह से हुई है। सरकार आंकड़े को छिपा रही है।

एंबुलेंस से जुड़ा सवाल भी उठा
विधान परिषद में प्रेमचंद्र मिश्रा ने एंबुलेंस से जुड़ा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि विधायक या पार्षद अपने ऐच्छिक कोष से एंबुलेंस देते हैं तो उसके चलाने की कोई व्यवस्था नहीं की जाती। अगर यह व्यवस्था समय पर कर दी जाती तो भी सरकार को 50 एंबुलेंस मिल गए होते। जवाब में सरकार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने कहा कि अगर कोई माननीय एंबुलेंस देते हैं तो उसके पहले जिले के जिलाधिकारी या उप विकास आयुक्त से बात कर लें। हम सभी एंबुलेंस को लेकर नहीं चलवा सकते हैं, क्योंकि उसके लिए खर्च का प्रावधान कहां से होगा? खर्च बजट के अनुसार ही होता है।
उन्होंने बताया कि अभी तक 51 सदस्यों से एंबुलेंस ली गई हैं। इनको चलाया जा रहा है। तीसरी लहर को देखते हुए भी एंबुलेंस की संख्या बढ़ाई जाएगी। मिश्रा ने कहा कि सरकार को इससे जुड़े प्रावधान को व्यवहारिक बनाया जाना चाहिए और विधायक या पार्षद के ऐच्छिक कोष से लिए जाने वाले एंबुलेंस के पेट्रोल-डीजल की व्यवस्था के साथ ही ड्राइवर का इंतजाम भी कराना चाहिए। दूसरी लहर में सभी लोग देख चुके हैं कि एंबुलेंस की कितनी जरूरत लोगों को पड़ी थी।
20 जुलाई को केंद्र ने कहा था- ऑक्सीजन की कमी से नहीं गई जान
20 जुलाई को केंद्र सरकार ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में कहा था कि किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश ने ऐसा रिपोर्ट नहीं किया है कि ऑक्सीजन की कमी के कारण दूसरी लहर में किसी की जान गई है। केंद्र सरकार के इसी दावे को लेकर विवाद हुआ है, विपक्ष की कई पार्टियां सरकार को घेर रही हैं। दूसरी ओर सरकार भी पलटवार कर रही है।



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