मुजफ्फरपुर के प्रसिद्ध इस्लामपुर मार्केट की बनी लहठी देश भर में चर्चित है। यहां की बनी लहठी पहनकर कभी वैजयंती माला तो कभी ऐश्वर्या राय सजती-संवरती थी। बॉलीवुड की शायद ही ऐसी कोई सुपरस्टार हो, जिन्होंने यहां की बनी लहठी नहीं पहनी हो। आज कोरोना और लॉकडाउन के कारण इस मार्केट की हालत खस्ता है। जहां ग्राहकों को कल तक लहठी खरीदने के लिए अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता था, वहीं आज दुकानदारों को ग्राहकों के आने की आस में टकटकी लगाए रहना पड़ता है। पिछले साल से ही बाजार में जो गिरावट आई, वह अबतक ठीक नहीं हो सकी है।
सावन में भी ग्राहकों का टोटा
बाबा 555 लहठी भंडार के संचालक मोहम्मद मोबारक बताते हैं कि सावन में चूड़ी-लहठी की बिक्री जोरों पर होती थी। पिछले साल से बाजार में गिरावट आ गयी। वह आज भी बरकरार है। ग्राहकों के लिए दिन भर राह देखनी पड़ती है। कोरोना के कारण ग्राहक नहीं आते हैं। मंदिर बन्द है, इसलिये सावन का उतना असर नहीं दिख रहा है। इस बार तो लग्न भी बीत गया। मार्केट में तेज़ी नहीं के बराबर रही।
सचिन तेंदुलकर की पत्नी और सानिया मिर्जा ने पहनी थी लहठी
मोबारक बताते हैं कि बॉलीवुड सुपरस्टार के अलावा मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर की पत्नी और टेनिस सुपरस्टार सानिया मिर्जा ने भी उनके दुकान में बनी लहठी पहनी है। मोबारक कहते हैं कि सानिया के लिए खुद उन्होंने डिजाइनर लहठी बनाई थी, जो उन्होंने अपनी निकाह के दौरान पहनी थी।


अगर यही हालात छह माह और रह गए तो इस्लामपुर की लहठी खनकने की जगह खामोश न हो जाए।
70 साल पुरानी है दुकान
बताया जाता है कि बाबा 555 लहठी भंडार 70 साल पुराना है। मोबारक के दादा ने यह दुकान खोली थी, जिसे उनके पिता और उन्होंने मिलकर आगे बढ़ाया। पिछले साल कोरोना की ऐसी मार पड़ी कि बाजार एकदम गिर गया। मोबारक ने बताया कि उनके कारखाने में चार सौ कारीगर काम करते थे। आज सिर्फ सौ कारीगरों से काम चलाना पड़ता है। दुकान में भी 25 स्टाफ थे। अब सिर्फ पांच रह गए हैं।
बाहर के खरीददार नहीं आ रहे
पिछले साल से बाहर के खरीददार नहीं आ रहे हैं। इस कारण बिक्री समाप्त हो गई है। उत्तर बिहार में भी कई जगहों पर लहठी की सप्लाई करते थे। अब वो भी बंद हो गया। इस बार बाजार खुला तो कुछ उम्मीद जगी। फिर बाढ़ के प्रकोप ने सब चौपट कर दिया।
80 फीसदी तक सिमट कर रह गया मार्केट
एक साल में मार्केट में भारी गिरावट आई है। यहां का कारोबार 80 फीसदी तक सिमट कर रह गया। दूसरे दुकानदार अख्तर बताते हैं कि सावन के महीने में भी बोहनी के लिए सोचना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस मार्केट में लहठी की कई दुकानें हैं। कोरोना से पहले सब अच्छा कमा-खा रहे थे। लेकिन, अब कई दुकानदारों ने व्यवसाय बदलने तक की बात करनी शुरू कर दी है।
कहीं गुमनामी के अंधेरे में न गुम हो जाए लहठी के खनकने की आवाज़
दुकानदारों का कहना है अगर यही हालात छह माह और रह गए तो इस्लामपुर की लहठी की खनकने की आवाज़ गुमनामी के अंधेरे में गुम हो जाएगी। इसके लिए सरकार स्तर से भी मदद की उम्मीद लगाएं हैं। कहते हैं इस्लामपुर लहठी का बहुत बड़ा उद्योग बन सकता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी यहां का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने लहठी उद्योग को बढ़ावा देने की बात भी कही थी।



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