नदियों के जलस्तर में उतार- चढ़ाव जारी है। कांटी, मोतीपुर, मुशहरी में बूढ़ी गंडक नदी में उफान के कारण दबाव बना हुआ है। बागमती की तबाही बर्री-तेहवारा, बसघटा-पहसौल, डुमरी-पहसौल, कटरा-माधोपुर पथ पर चढ़ा पानी। पैगंबरपुर कोल्हुआ मिठनसराय विकास समिति के संस्थापक अधिवक्ता अरुण पांडेय ने कहा कि गांव में जाने वाले मुख्य मार्ग पर छह फीट पानी बह रहा है। विजयी छपरा, मिठनसराय, सिकन्दरपुर कुंडल, आश्रमघाट इलाके में बाढ़ का पानी फैल गया है। इस कारण लोग नाव के सहारे आ-जा रहे हैं। बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर 52.52 मीटर पर है जबकि खतरे का निशान 52.53 मीटर पर चिन्हित किया गया है। बागमती का जलस्तर 55.70 मीटर पर है जबकि यहां खतरे का निशान 55.23 मीटर पर चिन्हित है। इसी तरह से गंडक नदी का जलस्तर 53.72 मीटर पर चिन्हित है जबकि खतरे का निशान 54.41 मीटर पर चिन्हित है।

बागमती से बाढ़ का पानी अब भी बर्री-तेहवारा, बसघटा-पहसौल, डुमरी-पहसौल, कटरा-माधोपुर आदि मुख्य मार्ग पर चढ़ा है। बागमती तटबंध के भीतर बसे मोहनपुर, बकुची, अंदामा, पतारी, माधोपुर, बर्री, भवानीपुर आदि गांव के लोग दहशत में है। लोग बांध पर शरण लिए हुए हंै।
अभियंताओं की टीम ने किया क्षतिग्रस्त पुल का निरीक्षण

सकरा (मुजफ्फरपुर), संस : थाना क्षेत्र के दक्षिण पश्चिम छोर स्थित मन गौड़ीहार के क्षतिग्रस्त पुल का निरीक्षणअभियंताओं की टीम ने किया। बताया जाता है कि यह पुल सौ साल पुराना है। यह पुल खालिकनगर गौड़ीहार पंचायत के दो हिस्से को जोडऩे के साथ वैशाली और मुजफ्फरपुर जिले को भी जोड़ता है। पुल क्षतिग्रस्त होने से यात्री बसों और लोड ट्रक के परिचालन पर रोक लगा दी गई है। अधीक्षण अभियंता सुरेश कुमार झा ने मन नदी पर क्षतिग्रस्त पुल के पास इससे लंबे पुल के निर्माण की जरूरत बताई। वहीं, अभियंताओं से इसकी फाइल तैयार कर आगे बढ़ाने का निर्देश दिया। मुखिया महेश शर्मा के नेतृत्व में स्थानीय लोगो ने यहां 20 फीट लंबा पुल बनाने की मांग की। टीम में सहायक अभियंता कुढऩी कमलेश कुमार राम, मंडल सहायक अभियंता सकरा गणेश कुमार, कनीय अभियंता सकरा आशुतोष कुमार शामिल रहे। लोगों को जल्द ही नए पुल के निर्माण का आश्वासन दिया।




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