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बोधगया में टूरिज्म इंडस्ट्री से जुड़े सैकड़ों कर्मचारी हुए बेरोजगार / कोरोना की वजह से नहीं आ रहे हैं पर्यटक

बोधगया में पर्यटन सीजन के आगाज की दूर-दूर तक कोई हलचल नहीं दिख रही है। टूर एंड ट्रेवल इंडस्ट्री से जुड़े यहां सैकड़ों लोग बेरोजगारी की कगार पर पहुंच गए हैं। कोरोना की वजह से विदेश पर्यटकों ने पूरी तरह से दूरी बना ली है। बोधगया में सबसे पहले श्रीलंकाई पर्यटक आकर टूरिज्म के पीक सीजन का आगाज करते थे। लेकिन, पिछले साल की तरह इस बार भी सन्नाटा पसरा हुआ है।

बोधगया में फैला है सन्नाटा।

बोधगया में फैला है सन्नाटा।

बोधगया में प्रति श्रद्धालु इतना खर्च

बोधगया में अब तक विदेशी पर्यटकों की ओर से कोई भी बुकिंग नहीं की गई है। टूर ऑपरेटरों की मानें तो एक पर्यटन सीजन में श्रीलंका से कम से कम 50 हजार बौद्ध श्रद्धालु बोधगया व अन्य बौद्ध स्थलों का भ्रमण करते थे। अनुमान के तौर पर प्रति श्रद्धालु सिर्फ बोधगया में 25 से 35 हजार रुपये खर्च करते थे। उस 25-35 हजार अंदर आवासन से लेकर दान, ट्रैवलिंग, भोजन व खरीदारी भी टूर एंड ट्रैवल्स अपने पैकेज में शामिल रखते थे।

इन श्रद्धालुओं के आमद नहीं होने से सिर्फ बोधगया को 50 करोड़ रुपए का नुकसान है। इसके अलावा अन्य बौद्ध स्थलों व विमान सेवा व रेलवे को अलग ही नुकसान शामिल है। कई होटल संचालकों का कहना है कि अब तक श्रीलंका श्रद्धालुओं के आमद की कहीं कोई चर्चा नहीं है।

टूर ऑपरेटरों की ओर से भी कोई तैयारी नहीं

श्रद्धालुओं की आमद जून- जुलाई से ही आने के संकते मिलते लगने थे। लेकिन, इस बार ऐसा कुछ भी नहीं है। टूर एंड ट्रैवल्स की मानें तो अब तक श्रीलंका पर्यटकों की ओर से एक भी बुकिंग नहीं हो सकी है। आगे भी कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। यहां यह हाल लगातार दूसरी बार देखने को मिल रहा है। श्रीलंका के श्रद्धालु अगस्त से अक्तूबर तक और फिर फरवरी से अप्रैल तक बोधगया का भ्रमण किया करते थे। यहां का मौसम उस समय उनके मुताबिक अनुकूल रहता है। खास बात यह है भी कि टूर आपरेटरों द्वारा इस बार पर्यटकों के लिए कोई टूर पैकेज भी तैयार नहीं किया गया है। न ही इसके लिए श्रीलंका में कोई प्रचार।

श्रद्धालुओं पर आश्रित बोधगया की आर्थिक स्थिति बदहाल हो गई है। आलम यह भी है कि होटल व टूर ट्रैवल्स इस मसले पर पर बात करने से भी खुद को दूर रख रहे हैं। उनकी मानें तो कोरोना की वजह से व्यापार नष्ट होने की वजह से मानसिक आर्थिक परेशानी से अधिक मानसिक व घरेलू परेशानियां बढ़ने लगी हैं। ऐसे में अब कुछ भी सुनना व समझना अच्छा नहीं लगता है।

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