गणित की परीक्षा में फॉर्मूले का काफी महत्व होता है। गणित विषय की परीक्षा में 60 प्रश्न वस्तुनिष्ठ के होंगे। इनमें से 50 प्रश्नों का उत्तर देना होगा। अधिकतर वस्तुनिष्ठ प्रश्न फार्मूला आधारित हो सकते हैं। इससे आपको वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की तैयारी के लिए फार्मूले पर विशेष ध्यान देना चाहिए। ये सलाह टेली काउंसिलिंग के दौरान पटना विवि के साइंस कॉलेज के प्राचार्य और गणित विषय के विशेषज्ञ प्रो.केसी सिन्हा ने दी।
विशेषज्ञ केसी सिन्हा ने बताया कि वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की तैयारी के लिए जरूरी है कि हर चैप्टर से सब्जेक्टिव प्रश्नों की तैयारी करें। क्योंकि सब्जेक्टिव प्रश्नों से ही वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाते है। उन्होंने कहा कि बोर्ड के मॉडल प्रश्न पत्रों से जरूर पढ़ाई करें क्योंकि उससे बहुत मदद मिलेगी। रिलैक्स मूड में पढ़ें गणित विषय: प्रो. सिन्हा ने बताया कि गणित पढ़ने का सही समय वही है, जब छात्र खुद को रिलैक्स महसूस करें। हर दिन तीन से चार घंटे इस विषय पर देना चाहिए। समय अपने अनुसार तय करें।गणित में इस बार वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की संख्या बढ़ाई गयी है। कुल 90 प्रश्न पूछे जायेंगे। इनमें 69 प्रश्नों का उत्तर देना होगा। वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की संख्या 60 होगी। इनमें 50 का उत्तर देना होगा। वहीं लघु उत्तरीय 22 प्रश्न पूछे जायेंगे, इनमें 15 का जवाब देना होगा। दीर्घ उत्तरीय आठ प्रश्न रहेंगे, इनमें चार का उत्तर देना होगा।

ये हैं कुछ महत्वपूर्ण चैप्टर
कैलकुलस में मैक्सिमा और मिनिमा, मीन वैल्यू थ्योरम, रैल्स थ्योरम, इनडेफिनिट इंटीग्लर, प्रॉपर्टी ऑफ डेफनिट इंटीग्लर्स, एरिया बाउडेड वाइ कर्वस, डिफरेसियल इक्वेशन, लिनियर प्रोग्रामिंग, डॉट एंड क्रॉस प्रोडक्ट, दो रेखाओं के बीच न्यूनतम दूरी, डिटरमिनॉट, इनर्वस स्क्रूलर
इस बार ऐसा रहेगा गणित के प्रश्न पत्रों का पैटर्न, तैयारी से पहले इन्हें जानें
– वस्तुनिष्ठ 60 प्रश्न होंगे, इनमें 50 प्रश्नों का जवाब देना है
– लघु उत्तरीय 22 प्रश्न रहेंगे, इनमें 15 प्रश्नों का उत्तर देना होगा
– दीर्घ उत्तरीय आठ प्रश्न पूछे जायेंगे इनमें से चार प्रश्नों का उत्तर देना होगा

उत्तर देने में शब्दों का रखें ख्याल
प्रो. सिन्हा ने कहा कि उत्तर देने में शब्द सीमा का ख्याल रखें। लघु उत्तरीय प्रश्नों का उत्तर 30 से 50 शब्दों में दें। वहीं दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों का उत्तर 150 से 250 शब्दों में दें। शब्द सीमा में उत्तर रहता है तो परीक्षक पर सकारात्मक असर होता है और वो पूरा अंक देते हैं।
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