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वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में घड़ियाल के 300 अंडे खराब / गंडक में बहुत ज्यादा पानी आने के कारण घड़ियालों के 8 प्रजनन केंद्रों पर हुआ नुक’सान, बह गए सैकड़ों अंडे

गंडक नदी में उफान के कारण इस बार वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) द्वारा प्रजनन के लिए 8 केंद्रों पर रखे गए लगभग 300 अंडे नष्ट हो गए हैं। गंडक नदी घड़ियालों का अधिवास क्षेत्र है। नदी के किनारे इनके दर्जनों प्रजनन केंद्र हैं। VTR की ओर से इनके संरक्षण और संवर्धन के लिए 8 केंद्रों पर लगभग 300 अंडों को बचाने के लिए ऊंचे स्थानों पर रखा गया था। गंडक नदी में 4.25 लाख क्यूसेक पानी आ जाने से ये सभी अंडे नष्ट हो गए हैं, जिससे इस साल घड़ियालों के अंडे बचाए नहीं जा सके हैं।

VTR के वन संरक्षण सह निदेशक हेमकांत राय ने बताया कि इस साल 8 जगह पर मगरमच्छों ने अंडे दिए थे। एक जगह पर 30-40 अंडे पाए गए थे। लगभग 300 अंडों को बचाने के लिए ऊंचे स्थान पर रखा गया था, लेकिन समय से पहले दो बार तूफानी बारिश आई, जिसमें बहुत सारे अंडे बर्बाद हो गए। वहीं, कुछ अंडे डूब गए।

घड़ियाल की फाइल फोटो।

घड़ियाल की फाइल फोटो।

नदी में घड़ियालों की सुरक्षा व संवर्धन के लिए वाल्मीकि टाइगर रिजर्व ( VTR) प्रशासन ने 2018 में सर्वेक्षण कराया था। इसमें वाल्मीकिनगर से सोनपुर तक 320 किमी की दूरी में 250 घड़ियाल पाए गए थे। गंडक में इनकी संख्या नियमित रूप से मिली थी। सर्वेक्षण में यह भी बात सामने आई कि गंडक बराज एवं अन्य इलाके में घड़ियालों के आधा दर्जन प्रजनन केंद्र थे। पानी के दबाव से ज्यादातर अंडे नष्ट हो जाते थे। इसे देखते हुए VTR प्रशासन वार्षिक कार्ययोजना से ITWH के तहत घड़ियाल संरक्षण का कार्य करता है। यहां रेत में मादा घड़ियाल मई में 30-40 सेमी गहरा गड्ढा खोदकर 30-40 की संख्या में अंडे देती हैं। इन्हें बचाने के लिए एक्सपर्ट की मदद से घड़ियालों के अंडे को ऊंचे स्थान पर रखा जाता है। इस साल भी ऐसा ही किया गया था, लेकिन गंडक नदी में अचानक लगभग 4.25 लाख क्यूसेक पानी आने के कारण अंडों को बचाया नहीं जा सका।

सर्वेक्षण के दौरान शिशु घड़ियाल की मिली थी लाश

बिहार में गंडक नदी में घड़ियाल मिलने की कहानी भी दिलचस्प है। 2003 में बिहार में ही एक अन्य लुप्तप्राय जीव गंगा डॉल्फिन का सर्वेक्षण चल रहा था। उस समय गंडक में कोई जीवित घड़ियाल तो नहीं दिखा, लेकिन एक शिशु घड़ियाल की लाश मिली, जिसकी पूंछ कटी हुई थी। इस घटना के बाद से भारतीय वन्यजीव ट्रस्ट (वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया) के समीर कुमार सिन्हा की दिलचस्पी गंडक में घड़ियाल के प्रति बढ़ती गई। गंडक किनारे स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में काम करते हुए एक बार उन्होंने गंडक के नेपाल वाले हिस्से में त्रिवेणीघाट पर सात-आठ घड़ियाल देखे। इसके बाद कई संगठनों ने एक साथ मिलकर 2010 में गंडक में एक साथ कई प्रजातियों के सर्वेक्षण का कार्य शुरू किया। इसी सर्वेक्षण में गंडक में बचे-खुचे घड़ियालों का पता चला।

2015 के सर्वेक्षण में गंडक में मिले थे 54 घड़ियाल

इस सर्वेक्षण के बाद 2012 में बिहार सरकार का ध्यान इस ओर गया और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घड़ियालों में दिलचस्पी दिखाते हुए उनके पुनर्वास के लिए वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट से तकनीकी मदद मांगी। बिहार सरकार का वन विभाग भी इस परियोजना में जुट गया। इन प्रयासों से मार्च 2015 के सर्वेक्षण में गंडक में 54 घड़ियाल पाए गए, जिनमें 26 घड़ियाल वयस्क थे।

गंडक नदी में छोड़े गए थे 116 घड़ियाल

पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान जैसे स्थलों में रखे गए घड़ियालों के प्राकृतिक प्रजनन के लिए गंडक में ऐसे सुरक्षित स्थानों को चिह्नित किया गया, जहां उन्हें छोड़ा जा सकता था। घड़ियालों की पहचान के लिए एक निश्चित निशान देकर उच्च फ्रीक्वेंसी के रेडियो उपकरणों व सैटेलाइट ट्रांसमिशन जैसे निगरानी उपकरणों से जोड़ा गया। कुछ वर्ष पूर्व ऐसे 116 घड़ियालों को गंडक में छोड़ा गया था। वर्तमान में लगभग 300 घड़ियाल हैं।

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