बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर कम हो जाने के बाद घर से पानी निकलने के बावजूद करीब डेढ़ सौ परिवार अभी भी दरभंगा फोरलेन पर डेरा जमाए हुए हैं। इन लोगों को आशंका है कि नदी का जलस्तर बढ़ा तो बाढ़ का पानी फिर से घरों में घुसेगा और फिर जान बचाने के लिए हाईवे पर ही आना होगा। बाढ़ पीड़ितों के बीच प्रशासन के रवैये को लेकर भी नाराजगी है। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि प्रशासन की तरफ से कोई राहत सामग्री मुहैया नहीं कराई जा रही है। जबकि, 15 दिनों से अधिक समय से हाईवे पर दिन-रात काट रहे हैं। दूसरी ओर, शेरपुर ढाब में अब भी बाढ़ का भी पानी भरा है।

लोग नाव के सहारे आ-जा रहे हैं। हाईवे पर प्लास्टिक के तंबू में पोता-पोती के साथ समय काट रहीं मिठनसराय की सुनीता देवी की शिकायत है कि प्लास्टिक तक उसे प्रशासन ने मुहैया नहीं कराया। एक हजार रुपए खर्च कर बाजार से खरीदना पड़ा, तब धूप और बारिश से बच रहे हैं। हालांकि, मिठनसराय में पानी कुछ कम हुआ है।

लेकिन जिस तरह का अभी मौसम बना हुआ है, कभी भी भारी बारिश के बाद नदी का जलस्तर बढ़ सकता है। एेसे में घर लौटना सही नहीं है। कोल्हुआ के सुनील कुमार ने कहा कि बाढ़ राहत के नाम पर अब तक प्रशासन से कोई सहयोग नहीं मिला। प्लास्टिक से लेकर बांस-बल्ले तक खुद खरीदना पड़ा। हाईवे पर मुश्किल में जिंदगी कट रही है।




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