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2 दिहाड़ी मजदूर के बेटों को 42-42 लाख की स्कॉलरशिप / हरियाणा के अशोका यूनिवर्सिटी में करेंगे पढ़ाई, दोनों छात्र मुसहर समाज से, परिवार में कोई अब तक कॉलेज भी नहीं पहुंचा

बिहार के पटना जिले में रहने वाले दो युवाओं को प्रतिष्ठित अशोका यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के लिए 42-42 लाख रुपए की स्कॉलरशिप मिली है। दोनों समाज के सबसे निचले पायदान पर आने वाले मुसहर समाज से आते हैं। गौतम कुमार मसौढ़ी से रहने वाले हैं और अनोज कुमार दानापुर के पास जमसौत के। दोनों पटना जिले में पड़ता है। दोनों 18 साल की उम्र के युवा हैं और बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) में आते हैं।

स्कॉलरशिप हासिल करने वाला छात्र अनोज।

स्कॉलरशिप हासिल करने वाला छात्र अनोज।

4 साल की पूरी पढ़ाई का खर्च

यह स्कॉलरशिप गौतम और अनोज के 4 साल की पढ़ाई की पूरी लागत को कवर करेगी। इसमें ट्यूशन फीस, निवास, किताबें, स्वास्थ्य बीमा और यात्रा के खर्च शामिल हैं। इसके अतिरिक्त दोनों छात्रों को व्यक्तिगत खर्चे के लिए मासिक जेब खर्च भी दिया जाएगा। अशोका यूनिवर्सिटी में18 से अधिक देशों के छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। गौतम और अनुज अपने परिवार से कॉलेज जाने वाले पहले सदस्य होंगे। दोनों को डेक्सटेररिटी ग्लोबल द्वारा प्रशिक्षित किया गया है।

समाज के सबसे निचले तबके मुसहर समाज से आते हैं गौतम।

समाज के सबसे निचले तबके मुसहर समाज से आते हैं गौतम।

21.93 करोड़ से ज्यादा की स्कॉलरशिप मिली इस संस्था के जरिए

डेक्सटेरिटी ग्लोबल शैक्षणिक अवसरों और प्रशिक्षण के माध्यम से भारत और विश्व के लिए नेतृत्व की अगली पीढ़ी तैयार करता है। बिहार के चर्चित सामाजिक उद्यमी शरद सागर ने 2008 में इस संगठन की स्थापना की थी। हाल ही में संगठन ने घोषणा की कि संगठन के बच्चों को इस वर्ष एशिया, अमेरिका और यूरोप के कॉलेजों में पढ़ने के लिए 21.93 करोड़ से अधिक की स्कॉलरशिप प्राप्त हुई है। अशोका यूनिवर्सिटी में गौतम कंप्यूटर साइंस में डिग्री हासिल करेंगे और अनोज गणित में अपना करियर बनाएंगे।

गौतम के पिता टोला सेवक
गौतम के पिता संजय मांझी मसौढ़ी में टोला सेवक और दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते है। उनकी मां लगनी देवी एक ग्रहणी हैं। छात्रवृत्ति मिलने के बाद गौतम ने भास्कर को बताया कि मैं अपने परिवार से कॉलेज जाने वाला पहला व्यक्ति बनूंगा यह मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है। यह डेक्सटेरिटी चैरिटी ग्लोबल के बिना संभव नहीं था। मेरे लिए यह एक बड़े सपने के सच होने जैसा है। कंप्यूटर साइंस पढ़ना मेरा सपना है और यह अब पूरा होने जा रहा है। मेरे समाज में इतने बढ़िया कॉलेज से किसी ने पढ़ाई नहीं की है। ज्यादातर ने तो इंटर के बाद पढ़ाई ही नहीं की। मेरे पास अपना कंप्यूटर भी नहीं है। मैं अपनी शिक्षा का उपयोग अपने समाज की सेवा करने में लगाऊंगा।

अनोज के पिता दिहाड़ी मजदूर
अनोज के पिता महेश मांझी जमसौत में दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते हैं। उनकी मां शांति देवी का स्थानीय आंगनबाड़ी में खाना बनाने का काम करती हैं। छात्रवृत्ति मिलने पर गौतम ने भास्कर को बताया कि मेरे मां-पिता कभी स्कूल नहीं जा सके। मैं भी अपने पिता की तरह खेतों और निर्माण स्थलों पर काम करते रह सकता था लेकिन मैं शुक्रिया अदा करना चाहता हूं कि मुझे इतना बड़ा अवसर दिया गया है। मैं अपनी शिक्षा की बदौलत अपने समाज की सेवा करना चाहता हूं।

इन दोनों पर हमें गर्व
डेक्सटेरिटी ग्लोबल के संस्थापक और सीईओ शरद विवेक सागर ने भास्कर को बताया कि साल 2013 में मेरा पहली बार गौतम और अनोज के विद्यालय में जाना हुआ था। दोनों शोषित समाधान केंद्र के छात्र हैं, जिसकी स्थापना जेके सिन्हा ने की थी। दोनों से मिलने के बाद ही उन्हें सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में भेजना मेरा लक्ष्य बन गया। अब तक इस समुदाय के कई युवा बच्चों को तैयार किया गया है। शरद ने कहा कि मैं भावुक हूं कि गौतम और अनुज दोनों छात्रवृत्ति पर उत्कृष्ट कॉलेज में शिक्षा लेने जा रहे हैं। इन दोनों पर पर गर्व है।

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