कोरोना महामारी को देखते हुए इस बार भी मुजफ्फरपुर के प्रसिद्ध बाबा गरीबनाथ के पट श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेंगे। सावन के महीने में करीब 12 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा पर जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। मंदिर के बंद होने से करीब 500 लोगों की रोजी-रोटी पर असर पड़ रहा है। विगत वर्ष भी जलाभिषेक नहीं किया गया था। मंदिर को बंद हुए 95 दिन हो गए। उक्त बातों की जानकारी मंदिर के प्रधान पुजारी पंडित विनय पाठक ने दी।
उन्होंने कहा कि छह अगस्त तक सरकार का गाइडलाइन है कि मंदिरों को बंद रखना है। इसके बाद तीसरी और चौथी सोमवारी बचती है। इसमें करीब आठ लाख श्रद्धालु जलाभिषेक करने आते हैं। उस समय तक अगर मंदिरों को खोलने का आदेश भी जारी कर दिया जाता है। फिर भी इतने कम समय मे चीजों को व्यवस्थित नहीं किया जा सकता है। क्योंकि सबसे अधिक भीड़ तीसरी और चौथी सोमवारी को ही होती है।

बाहर से ही दर्शन कर रहे श्रद्धालु
प्रधान पुजारी ने बताया कि कोरोना काल मे लगातार तीन माह से मंदिर के पट भक्तों के लिए बंद हैं। अभी भी श्रद्धालु बाहर से ही पूजा कर चले जाते हैं। आम दिनों में भी मंदिर में सुबह के समय इतनी भीड़ उमड़ती है कि संभालना मुश्किल हो जाता है।
आर्थिक तंगी का करना पड़ रहा सामना
पंडित पाठक ने बताया कि सावन में एक करोड़ से अधिक रुपए का चढ़ावा भक्त बाबा को चढाते हैं। लेकिन, पिछले साल इसकी 40 फीसदी भी चढ़ावा नहीं हुआ था। इससे मंदिर के विकास कार्यों समेत अन्य खर्चों पर भी असर पड़ता है। इस बार भी वही स्थिति है। बाबा गरीबनाथ का पट बंद रहने से करीब 500 लोगों से अधिक का व्यवसाय प्रभावित हुआ। इससे गत वर्ष 60 लाख का नुकसान बताया गया है।

सैंकड़ो साल पुराना है मंदिर का इतिहास
1846 से ही यहां पर शिव मंदिर है। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि 1950 के बाद मंदिर की प्रसिद्धि बढ़ने लगी। देखते-देखते यह शिव मंदिर बाबा गरीबनाथ स्थान में तब्दील हो गया और तब से लेकर आज तक भक्तों का विश्वास बाबा पर बना हुआ है।

भक्तों ने कहा, बाहर से करेंगे दर्शन
बाबा पर जलाभिषेक नहीं करने का दुख तो सभी भक्तों के मन मे है। लेकिन, विश्वास इतना है कि बाहर से भी बाबा के पट को छूकर ही मन को शांत करेंगे। कच्ची पक्की की नेहा सिंह, पूनम देवी, अशोक शर्मा, प्रेमजीत कुमार और बीरेंद्र कुमार ने बताया कि पिछले दस साल से बाबा पर जलाभिषेक कर रहे हैं। लेकिन, कोरोना के चलते पिछले साल भी जलाभिषेक नहीं कर पाए थे। इस बार भी बाबा के बाहर से ही दर्शन कर सन्तुष्ट हो जाएंगे। बता दें बाबा पर जलाभिषेक के भक्त पहलेजा घाट से जल लेकर पैदल आते हैं। फिर उसी जल से जलाभिषेक करते हैं। इसकी दूरी तकरीबन 90-100 किलोमीटर है।



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