देश में कोरोना की तीसरी लहर के खौफ के बीच बिहार में 10वीं से ऊपर क्लास के स्कूल कॉलेज खोल दिए गए। मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षा कराकर रिजल्ट जारी करने की तरह स्कूल खोलने में भी बिहार ने रिकॉर्ड बनाया है। स्कूल खोलने के लिए 3 फैक्टर काम किया है, इसमें संक्रमण वैक्सीनेशन के साथ स्टूडेंट्स के करियर का ध्यान रखा गया।
जोखिम, बचाव और पढ़ाई
सरकार ने 3 फैक्टर पर काम की है। संक्रमण का जोखिम और उससे बचाव के साथ पढ़ाई पर मंथन किया गया। इसमें जोखिम से बचाव को लेकर पहली प्राथमिकता रही इसके साथ पढ़ाई व स्टूडेंट्स के कैरियर को भी प्राथमिकता में रखा गया। काफी समीक्षा के बाद स्कूल खोलने का निर्णय लिया गया है। हालांकि पहले दिन स्कूलों में सुरक्षा को लेकर कोई व्यवस्था नहीं दिखी है और स्टूडेंट्स में भी उत्साह नहीं दिखा। इस कारण कारण स्कूलों में 10% से भी कम उपस्थिति रही।

स्कूलों के लिए यह बनी रणनीति
स्कूलाें में पढ़ाई का भी नुकसान नहीं हो और कोरोना का संक्रमण भी नियंत्रण में रहे इसे लेकर विशेष रणनीति बनाई गई थी। स्कूलों को शर्त के साथ खोला गया। इसमें 50% उपस्थिति का कड़ा निर्देश दिया गया। क्लास में स्टूडेंट्स के बैठने के लिए 6 फीट की दूरी की व्यवस्था बनाई जाए। स्कूली बसों में सैनिटाइजेशन की व्यवस्था, हैंड सैनिटाइजर के साथ कोविड के लिए जारी अन्य गाइडलाइन का अक्षरस: पालन कराने का निर्देश दिया गया था।
स्कूल-कॉलेज में दरवाजे की कुंडी, डैशबोर्ड, डस्टर, बेंच-डेस्क के साथ क्लास रूम को नियमित सैनिटाइज करने का निर्देश दिया गया था। इसके अलावा मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर भी विशेष फोकस दिया गया है। कोविड प्रोटोकाल के साथ राज्य के सरकारी विद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों के साथ ही निजी विद्यालयों, मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेज, सभी सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों और उच्च शिक्षा संस्थान को खोल दिया गया है।

दूसरी लहर में बिहार ने दिखाई तेजी
कोरोना की दूसरी लहर में बिहार ने काफी तेजी दिखाई है। स्कूलों के मामले से लेकर कोरोना पर नियंत्रण के साथ वैक्सीनेशन में भी यह तेजी दिखी है। अन्य स्टेट में स्कूल खोलने को लेकर अभी तैयारी की जा रही है और बिहार ने स्कूलों को खोल दिया है। कई स्टेट में कोरोना पर नियंत्रण नहीं होने के कारण स्कूल नहीं खोला जा रहा है। पहली लहर में के बाद बिहार बोर्ड ने हाई स्कूल और इंटरमीडिएट का रिजल्ट जारी किया जो देश में रिकाॅर्ड बना और अब दूसरी लहर के बाद स्कूलों को लेकर भी रिकार्ड बनाया गया है।
कोरोना संक्रमण पर तेजी से पाया काबू
बिहार सरकार ने लॉकडाउन से कोरोना को मात देने में बड़ा काम किया है। जिस तेजी से संक्रमण का ग्राफ बढ़ा उसी रफ्तार से संक्रमण पर अंकुश लगाने का भी काम किया गया। लॉकडाउन और सख्ती के कारण कोरोना को मात देने में बिहार सरकार को सफलता मिली है। अब कोरोना का आंकड़ा 100 से 150 के अंर रह रहा है। हालांकि आंकड़ा 3 दिनों से बढ़ा है, नहीं तो संक्रमण का ग्राफ अंडर 100 चल रहा था। 11 जुलाई तक कुल 7,23,283 कोरोना संक्रमित हुए है जिसमें 7,12,820 लोग ठीक हो चुके हैं। अब तक कुल 9,618 लोगों की मौत हुई है। प्रदेश में एक्टिव मामलों की संख्या भी अब 844 ही है।

वैक्सीनेशन में आ रही तेजी
बिहार में वैक्सीनेशन की रफ्तार काफी तेजी से आगे बढ़ रही है। वैक्सीन की कमी नहीं हो तो इसमें और तेजी आ जाएगी। सोमवार को शाम 4 बजे तक बिहार में 1,88,11,307 लोगों ने कोरोना का टीका लिया है इसमें पहला डोज लेने वालों की संख्या 1,60,81,533 और दूसरा डोज लेने वालों की संख्या 27,29,774 है। इसमें 18 से 44 साल के 83,30,397 और 45 से 60 साल के 54,12,696 और 60 से अधिक उम्र के 50,68,214 लोगों ने टीका लिया है। वैक्सीनेशन में तेजी के कारण भी कोरोना को लेकर भी स्कूल खोलने को लेकर तैयारी की गई।



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