बिहार के पूर्वी चंपारण में स्थित केसरिया का बौद्ध स्तूप (Kesaria Buddhist Stupa) बाढ़ के पानी से घिर गया है। नेपाल में हो रही बारिश से गंडक नदी में बाढ़ (Flood in Gandak River) आ गई है। यह पानी बिहार के निचले इलाकों में फैल रहा है। इसकी जद में केसरिया का बौद्ध स्तूप भी आ गया है। यह क्षेत्र राजधानी पटना (Patna) से करीब 120 किमी दूर है।
1988 में खोदाई से सामने आया राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक
केसरिया का बौद्ध स्तूप राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक है। इसे साल 1988 में पुरातत्व विभाग (Archaeological Survey of India) ने खोदाई कर दुनिया के सामने लाया था। यहां आवागमन की आदर्श स्थिति नहीं रहने के बावजूद बड़ी संख्या में विश्व भर से पर्यटक (Tourist) आते हैं। यहां आते हैं।


बौद्ध स्तूप का बाढ़ के पानी से घिरना हर साल की समस्या
बौद्ध स्तूप का बाढ़ के पानी से घिरना हर साल की समस्या है। पिछले साल भी स्तूप बाढ़ से घिर गया था। तब इसकी जानकारी केंद्र सरकार (Central Government) को दी गई थी। इस साल ऐसा एक पत्र केंद्र को भेजा गया है। पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी (DM) शीर्षत कपिल अशोक स्तूप के चारा ओर बाढ़ के पानी के जमाव को चिंतानतक मानते हैं।

पिछली बाढ़ में गिर गई थी स्तूप परिसर की चारदीवारी
विदित हो कि बीते साल गंडक नदी के चंपारण तटबंध (Champaran Embankment) के टूट जाने के कारण बाढ़ का पानी केसरिया बौद्ध स्तूप परिसर में घुस गया था। पानी के दबाव के कारण स्तूप के एक भाग की चारदीवारी भी गिर गई थी। स्तूप पर मंडराते खतरे को देखने के लिए बीते अगस्त 2020 में जिलाधिकारी शीर्षत कपिल अशोक नाव के सहारे वहां गए थे। तब उन्होंने केंद्र सरकार के पुरातत्व विभाग को स्थिति से अवगत कराने की बात कही थी। साथ ही यहां के कर्चारियों व स्तूप की सुरक्षा को लेकर निर्देश दिए थे।



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