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मुजफ्फरपुर में बूढ़ी गंडक, बागमती व गंडक लाल निशान पार, नरौली में रिसाव, फोरलेेन पर शरण ले रहे पीडि़त

जिले से गुजरने वाली नदियों के जलस्तर में वृद्धि जारी है। मिठनसराय, दादर, सिकंदरपुर कुंडल इलाके में बाढ़ का पानी घुसने से तबाही है। मिठनसराय के लोग गांव छोड़कर मुजफ्फरपुर-दरभंगा फोरलेन पर शरण ले रहे हैं। इससे शनि मंदिर चौक से संगम घाट तक एक लेन पूरी तरह से बंद कर दी गई है। विजयी छपरा में टेनी बांध पर दबाव से लोग रतजगा कर रहे हैं। नौरोली में बांध में रिसाव की सूचना पर बाढ़ नियंत्रण के कार्यपालक अभियंता बबन पांडेय ने टीम भेजकर इसे बंद कराया। बरूराज से लेकर पूसा तक बूढ़ी गंडक में लगे 86 स्लूस गेट बंद करा दिए गए हैैं। 150 चौकीदारों की तैनाती की गई है। 

टेनी बांध नहीं बांधने से अब जानमाल पर संकट

मिठनसराय विषहर स्थान पर टेनी बांध दो सौ फीट नहीं बांधने से अब उलटा पानी आने से तीन पंचायतों की करीब 25 हजार की आबादी तबाह है। बाबा विशेश्वरनाथ महादेव मंदिर के संस्थापक अधिवक्ता अरुण पांडेय ने कहा कि मुखिया गीता देवी, इंद्रमोहन झा व अनिल चौबे के साथ ग्रामीणों ने बैठक कर अपनी समस्याएं रखी हैं। उन्हें नाव व राहत चाहिए। अधिवक्ता ने कहा कि फोरलेन से रेलवे लाइन के बराबर 10 फीट ऊंचा व मिठनसराय गांव में आने वाली सड़क को उधर से मिला दिया जाए तो बाढ़ से निजात मिल जाएगी। बाढ़ के समय गांव में जाने का एक ही रास्ता है वह रेलवे लाइन के नीचे से जाता है। वहीं मुख्य रास्ता पार करने के लिए नाव का सहारा है। इसलिए प्रशासन टेनी बांध बांधने व रेलवे लाइन के उस पार और इधर एक सड़क निर्माण कराएं।

बढ़ रहा सभी नदियों का जलस्तर

गंडक, बागमती व बूढ़ी गंडक लाल निशान पार कर गई है। बूढ़ी गंडक के जलस्तर में मंगलवार को 20 सेंटीमीटर वृद्धि के साथ बूढ़ी गंडक का जलस्तर खतरे के निशान से 16 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। इससे शहर पर दबाव बढऩे लगा है। बागमती के जलस्तर में मामूली वृद्धि हुई है, जबकि गंडक का जलस्तर अब स्थिर हो गया है। बागमती का जलस्तर कटौझा में खतरे के निशान से एक मीटर 47 सेंटीमीटर तो बेनीबाद में 1.29 मीटर ऊपर पहुंच जाने से औराई, कटरा व गायघाट प्रखंडों में बाढ़ की स्थिति भयावह हो गई है। औराई-कटरा-बेनीबाद रोड पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। कटरा प्रखंड की 14 पंचायतों का सड़क संपर्क टूट गया है। साहेबगंज प्रखंड में गंडक का जलस्तर खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर ऊपर है। इससे तीन पंचायतों की 10 हजार आबादी प्रभावित है।

पशुपालकों के सामने मवेशियों के भोजन का संकट

बाढ़ प्रभावित इलाकों में मवेशियों के भोजन पर आफत है। पशुपालकों के घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। भूसा व सूखा चारा भीग गया है। लोग मवेशियों को लेकर बांध पर शरण लिए हैं। चारों तरफ पानी ही पानी है। इससे सूखा चारा नहीं मिल रहा है। पशुपालक नाव से जाकर दूसरे गांव से हरा चारा मवेशी के लिए ला रहे हैं। जिला पशुपालन पदाधिकारी डा.सुनील रंजन सिंह ने बताया कि बाढग़्रस्त प्रखंडों के लिए सरकार ने पशुचारा के लिए 10 लाख की राशि जारी की है। 1,250 रुपये क्विंटल भूसा व 2500 रुपये क्विंटल चोकर पशुपालकों को दिया जाएगा। बाढ़ में मवेशी की मौत होने पर सरकार मुआवजा देगी। इसके लिए मवेशी का पशु चिकित्सक से पोस्टमार्टम कराना होगा।

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