मुजफ्फरपुर स्थित SKMCH में इलाजरत दो बच्चों में मंगलवार को AES (एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम) की पुष्टि हई है। इस सम्बंध में SKMCH के उपाधीक्षक सह शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. गोपाल शंकर सहनी ने जानकारी देते हुए बताया कि लालगंज की दो वर्षीय सिमरन व राजा पुनास की दस माह की चांदनी का इलाज चल रहा था। इन दोनों बच्चों में AES के संदिग्ध लक्ष्ण मिले थे।
दोनों बच्चों की जांच कराई गई तो पैथोलॉजी जांच रिपोर्ट में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम की पुष्टि हुई है। दोनों का इलाज चल रहा है। बताया कि इससे पहले झपहां के सत्यम का इलाज चल रहा था। वर्तमान में SKMCH के वार्ड में तीन बच्चों का इलाज चल रहा है।
बता दें कि अब तक AES के 36 बच्चे अस्पताल में भर्ती हुए थे, जिनमें से 23 बच्चे स्वस्थ होकर आने घर चले गए। वहीं दो बच्चों के परिजन बिना अस्पताल को सूचना दिए ही अपने बच्चों को लेकर चले गए। इलाज के दौरान अब तक 8 बच्चों की मौत हो चुकी है। उपाधीक्षक ने कहा SKMCH के पीकू वार्ड में इलाज की सभी सुविधाएं मौजूद हैं। पीड़ित बच्चों की लगातार मॉनिटरिंग जारी है।
SKMCH में मिले एमआइएस-सी के मरीज
SKMCH में एमआइएस-सी (मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम) का एक संदिग्ध मरीज मंगलवार को पहुंचा। उसे सम्बन्धित वार्ड में भर्ती कर इलाज़ शुरू कर दिया गया। उपाधीक्षक सह शिशु रोग विभागाध्यक्ष डा.गोपाल शंकर सहनी ने कहा कि संदिगध एमआईएस-सी का मरीज भिखनपुर का आरव कुमार है। उसे तेज बुखार, शरीर में सूजन व लीवर बढने की शिकायत पर परिजन लेकर आये थे। एमआइएस-सी के प्रारंभिक लक्षण देखते हुए तुरन्त इलाज़ शुरू कर दिया गया। जांच करने पर पता लगा कि उसका डी डायमर व सीआरपी बढा हुआ है। एमआइएस की पुष्टि होने के लिए सभी आवश्यक जांच कराई जा रही है। डॉक्टरों की माने तो एमआईएस-सी बच्चों में होने वाली एक गंभीर बीमारी है, जो कोरोना वायरस से संक्रमित होने के दो से चार हफ्तों बाद नजर आती है। यह बीमारी दो महीने के नवजात तक में देखने को मिली है। इस बीमारी में डायरिया, उल्टी, सांस लेने में तकलीफ, थकान, चकत्ते, तेज बुखार इसके मुख्य लक्षण है।




Leave a Reply