एक ओर राज्य सरकार गेहूं क्रय को लेकर गंभीर थी तो राज्य खाद्य निगम (एसएफसी) के पदाधिकारी अपना लाभ लेने में व्यस्त रहे। जिला प्रशासन की जांच टीम की रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि पैक्स ने जो गेहूं एसएफसी के गोदाम में जमा कराए उसके लिए प्रति बोरी छह सौ ग्राम अधिक वजन लिया गया। इतना ही नहीं गेहूं जमा करने से पहले इसकी गुणवत्ता की भी जांच नहीं की गई। तुर्रा यह कि जांच के लिए जिन पदाधिकारियों को तैनात किया गया वे भी गोदाम पर मौजूद नहीं। सबकुछ भगवान भरोसे चलता रहा। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट डीएम प्रणव कुमार को सौंप दी है। वहीं इस तरह की गड़बड़ी पर एसएफसी के जिला प्रबंधक, कांटी के सहायक गोदाम प्रबंधक से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
मालूम हो कि एसएफसी के गोदाम में गेहूं जमा करने को लेकर पैक्सों से नाजायज राशि और गड़बड़ी किए जाने की शिकायत मीनापुर विधायक राजीव कुमार उर्फ मुन्ना यादव ने डीएम से की थी। इसके बाद डीएम ने जिला आपूर्ति पदाधिकारी मो. महमूद आलम एवं डीआरडीए निदेशक चंदन चौहान की दो सदस्यीय जांच टीम गठित की।
कहां से आया घुन लगा गेहूं
कांटी स्थित गोदाम की जांच के बाद टीम ने रिपोर्ट में कहा कि जो गेहूं जमा किए गए उनमें घुन लगे थे। इसका अर्थ यह हुआ कि उसकी गुणवत्ता की जांच नहीं की जा रही थी। वहीं बोरियों में टैग या स्टैंसिल नहीं लगे थे। इससे सवाल उठ रहा कि घुन लगे गेहूं कहां से आए। क्योंकि पैक्सों में घुन लगे गेहूं की खरीद नहीं की गई थी। आशंका जताई जा रही कि अच्छी गुणवत्ता वाले गेहूं की जगह कम दाम वाले खराब गेहूं को एसएफसी के पदाधिकारियों की मिलीभगत से गोदाम में जमा करा दिए गए। मिलीभगत की आशंका को इसलिए बल मिल रहा कि जांच के दौरान गोदाम पर सहायक प्रबंधक मिले ना गुणवत्ता नियंत्रक। टीम ने जमा किए गए गेहूं की जांच की तो उसमें घुन लगे थे।
दो से तीन दिनों तक ट्रक लगाने का दबाव बना वसूली
जांच में पैक्स अध्यक्षों की ओर से यह बात सामने आई कि गोदाम के बाहर दो-तीन दिनों तक गेहूं भरा ट्रक लगाने की नौबत जान बूझकर पैदा की गई।इससे ट्रक का दस से बीस हजार अतिरिक्त किराया देने का दबाव बना। इसका फायदा उठाकर आर्थिक दोहन किया गया। जांच के दौरान भी बोरियों को तौला गया। इसमें उसका औसत वजन 50.88 किलोग्राम पाया गया। यह करीब छह सौ ग्राम अतिरिक्त पाया गया।
डीएम ने मांगा स्पष्टीकरण
जांच टीम की रिपोर्ट के बाद डीएम प्रणव कुमार ने अलग-अलग एसएफसी के जिला प्रबंधक और कांटी के सहायक गोदाम प्रबंधक से एक सप्ताह में स्पष्टीकरण देने को कहा है।




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