बगहा में NH-727 से जुड़ने वाले लगभग आधा दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। इन गांवों से शहर की तरफ जाने वाले रास्ते बिल्कुल कट चुके हैं। गांव के चारों तरफ पानी ही पानी है। दवा से लेकर रोजमर्रा की चीजों के लिए इन गांवों के लोगों को परसौनी चौक जाना पड़ता है। बाढ़ के कारण वहां तक जाने के लिए भी रास्ता बंद हो चुका है। यहां के लोगों के लिए मात्र एक साधन नाव है। इन गांवों में छोटी नावें ही चल रही हैं, जिससे हादसा होने का खतरा है। बावजूद इसके लोग जरूरत की चीजों के लिए नाव का सहारा ले रहे हैं। यहां के ग्रामीणों का मानें तो नेशनल हाईवे से सिसवा गांव तक जोड़ने के लिए सड़क बनाई गई, जिसकी लंबाई 3 किलोमीटर है। अगर इस सड़क पर एक बड़ा पुल बना दिया गया रहता, तो यहां पर इस तरह के हालात नहीं बनते।
सुबह सुबह उठे तो कमर तक थी पानी
गांव की महिला प्रभावती देवी अपने समस्या को कह कर रोने लगी। रोते-रोते बस इतना ही कहा कि अब तक किसी ने कोई सहायता नहीं की। सब कुछ पानी में बह गया अब जीवन कैसे कटेगा। वहीं, किरण राम ने बताया कि रात में सही सलामत सोए हुए थे। सुबह जब उठे तो कमर तक पानी आ गया था। अपने परिवार के लोगों को लेकर घर से भागे। लगभग 1 घंटे बाद घर गिर गया पूरा घर में पानी भर गया। अभी बच्चों को रिश्तेदारी में भेज कर इसी तरह से जिंदगी काट रहे हैं।
दो नदियां बरपा रही हैं कहर
सिसवा गांव के पास दो नदी सिकरहना और मसान आपस में मिल गई, जिसके इस गांव में पानी ही पानी हो गया है। सिसवा बसंतपुर, जामदार टोला, बरवा, डोबी टोला, सिसवा, परोवहा, डुमरा, बढ़ई टोला में अचानक बाढ़ का पानी घुस आया। ग्रामीण विजय कुमार ओझा ने बताया कि अभी लगातार पानी का दबाव गांव पर है। अगर इससे ज्यादा मौसम खराब होता है और पानी का दबाव बढ़ता है तो गांव का कोई भी घर नहीं बचेगा।
खतरनाक है नाव की सवारी
यहां से निकलने के लिए मात्र एक साधन नाव है, जिसकी सवारी कर लोगों को गांव से बाहर निकलना पड़ रहा है। हालांकि यह सवारी बहुत ही खतरनाक है क्योंकि आधे किलोमीटर की दूरी में सैकड़ों पेड़ के पास से होकर गुजरना पड़ता है। थोड़ी सी असावधानी हुई और ना अगर पेंड़ से टकराया तो फिर हादसा होने में समय नहीं लगेगा।
अब तक नहीं मिली सरकारी सुविधा
ग्रामीणों ने बताया कि अब तक कोई भी अधिकारी सुध लेने के लिए नहीं आए हैं। गांव के बहुत से घर में पानी घुस गया है। इन घरों में खाना बनाने का भी कोई व्यवस्था नहीं है। लेकिन, अब तक कोई भी प्रशासन की तरफ से गांव के लोगों की परेशानी देखने के लिए नहीं पहुंचा है।




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