नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव ने जयप्रभा मेदांता अस्पताल में जाकर रूसी वैक्सीन स्पुतनिक लगवाई। वैक्सीन लेने के बाद पूर्व उपमुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने लालू प्रसाद के दोनों बेटों पर सवाल उठाते हुए कहा कि तेजस्वी और तेजप्रताप यादव यदि निजी अस्पताल के बजाय AIIMS, IGIMS पटना या किसी अनय सरकारी स्वास्थ्य केन्द्र में कोरोना का टीका लिए होते तो जनता के बीच अच्छा संदेश जाता। तेजप्रताप स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं। उन्हें उन निजी अस्पतालों की ब्रांडिंग से बचना चाहिए था, जो गरीबों की पहुंच से बाहर हैं। सुशील मोदी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री सहित कई अतिविशिष्ट व्यक्ति सरकारी संस्थानों में कोरोना का टीका ले चुके हैं।
फोटो में नीतीश कुमार, सुशील मोदी और मंगल पांडेय भी
सुशील मोदी के इस बयान के बाद राजनीति गर्म हो गई। तेजस्वी-तेजप्रताप की बहन और लालू प्रसाद की बेटी डॉ. रोहिणी आचार्या ने वह फोटो शेयर किया है, जिसमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जयप्रभा मेदांता अस्पताल का लोकार्पण कर रहे हैं और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी उनके बगल में खड़े हैं। मेदांता के शिलापट्ट पर दोनों के नाम भी अंकित हैं। नीतीश कुमार ने लोकार्पण किया था और सुशील मोदी ने अध्यक्षता की थी। तब स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय थे। फोटो में वे भी खड़े दिख रहे हैं। रोहिणी ने यह फोटो ट्वीट करते हुए लिखा है- ‘महंगे प्राइवेट हॉस्पिटल की ब्रांडिंग कर.. सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों का …बड़ा बुरा हाल किया… पशुओं के तबेले में तब्दील कर… बिहारी जनमानस के साथ… छल-फरेब का तूने काम किया !’


मोतियाबिंद का ऑपरेशन बिहार में करवाते
अपने भाई को नसीहत देने पर रोहिणी इतनी भड़कीं कि नीतीश कुमार को भी नसीहत दे डाली। कहा-‘ जनता के बीच अच्छा संदेश जाता… पलटू राम दिल्ली ना जाकर… बिहार में ही मोतियाबिंद का ऑपरेशन जो करवाते!
सुशील मोदी खुद कोरोना पॉजिटिव हुए तो एम्स में भर्ती हुए
RJD प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने सुशील मोदी से पूछा है कि- ‘आप खुद कोरोना पॉजिटिव हुए तो राज्य के अधीन किसी सरकारी अस्पताल में इलाज कराने के लिए क्यों नहीं भर्ती हुए। निजी अस्पताल को फ्री में जमीन आपके गुरु नीतीश कुमार और आपने दी है। फोटो में देखिए आप कैसे निजी अस्पताल को प्रमोट कर रहे हैं। शर्म आनी चाहिए।’
हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई थी
जयप्रभा मेदांता अस्पताल जहां अभी बना हुआ है, वह जमीन कर्पूरी ठाकुर की सरकार ने एक रुपए में जयप्रभा अस्पताल ट्रस्ट को दे दी थी। नीतीश सरकार ने जब उसकी लगभग साढ़े सात एकड़ जमीन मेदांता को दी तो मामला हाईकोर्ट गया। इस पर एक्टिविस्ट गगन गौरव और पंचदेव ने जनहित याचिका दायर कर रोक लगाने की मांग की, लेकिन हाईकोर्ट ने याचिका को रद्द करते हुए उल्टे दोनों पर 50 हजार रुपए का फाइन कर दिया था। दबाव था पर दोनों ने याचिका वापस नहीं ली थी।
जयप्रकाश नारायण और पत्नी प्रभावती देवी की याद में अस्पताल
संपूर्ण क्रांति के नेता जयप्रकाश नारायण का निधन किडनी फेल्योर होने से हुआ था और उनकी पत्नी प्रभावती देवी का निधन कैंसर से। इसलिए जयप्रभा अस्पताल ट्रस्ट की इच्छा यहां सरकारी स्तर पर कैंसर और किडनी मरीजों के लिए अस्पताल बनाने की थी, ताकि आम जरूरतमंदों की सस्ती दर पर इलाज हो सके। तब इसके लिए अमृत कोष का गठन भी किया गया था। गगन गौरव कहते हैं कि बिहार सरकार चाहती तो यहां जनसरोकार का ध्यान रखते हुए आम गरीबों और निम्न मध्यम वर्ग आय वाले लोगों के इलाज के लिए सुविधा उपलब्ध करवाती, लेकिन इसे कॉरपोरेट को सौंप दिया गया।




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