बालूघाट मुहल्ले में 15 दिनों से बारिश का पानी जमा है। इससे परेशान गोपाल कुमार कहते हैं कि जमा पानी निकलने का नाम नहीं ले रहा। इसके कारण महिलाएं एवं बच्चे घरों में कैद हैं। स्वजनों के स्वास्थ्य की चिंता सता रही है। इस नारकीय हालात से निजात के लिए कहां जाएं, किससे अपनी पीड़ा सुनाएं ? यह पीड़ा सिर्फ गोपाल कुमार की नहीं है, शहर के आधा दर्जन मुहल्लों में रहने वाले लोगों की है जो जलजमाव के कारण नारकीय हालात में जी रहे हैं। उनकी गुहार न सांसद- विधायक सुन रहे और न ही नगर निगम के जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी।
बालूघाट के अलावा रज्जू साल लेन, सर सीपीएन कालोनी, दास कालोनी, प्रोफेसर कॉलोनी, केंद्रीय विद्यालय रोड, कामेश्वर बिहार कालोनी, ब्रह्मापुरा मध्य विद्यालय गली, केदारनाथ रोड, पड़ाव पोखर लेन आदि ऐसे मुहल्ले हैं जहां बारिश की शुरुआत होते ही पानी जमा हो जाता है और दो माह तक बना रहता है। यह समस्या सालों से है। कुछ मुहल्लों में नालियां बनी पर उससे होकर पानी नहीं निकल रहे। ऐसे में नाला के रहने या नहीं रहने की बात बराबर है। जमा पानी कुछ दिनों में काला पड़ जाता है। इससे वहां महामारी फैलने की आशंका बनी रहती है। लेकिन इन मुहल्लों से जमा पानी निकालने का निगम के पास कोई प्लान नहीं है। विरोध होने पर पंङ्क्षपग सेट लगाकर पानी निकाला जाता है लेकिन हल्की बारिश होते ही फिर से पानी जमा हो जाता है। प्रोफेसर कालोनी निवासी संजय कुमार ने कहा कि नगर निगम को जनता से सिर्फ टैक्स चाहिए लेकिन जनता किस हाल में रह रही है इसकी जरा भी ङ्क्षचता नहीं। दास कालोनी निवास पंकज कुमार ने कहा कि नगर निगम नाला निर्माण एवं उसकी उड़ाही पर पानी की तरह पैसा बहाता है लेकिन बारिश का पानी नहीं निकल पाता। पानी निकासी के नाम पर हर साल पैसे की बर्बादी की जाती है।




Leave a Reply