अगर आप इलाज के लिए PMCH जा रहे हैं तो सावधान हो जाइए। यहां आपने सावधानी नहीं बरती तो सांस के रोगी हो सकते हैं। PMCH के डॉक्टर भी चेस्ट रोगी हो रहे हैं। इसका बड़ा कारण कैंपस की हवा में घुलता संक्रमण का जहर है। मेडिकल वेस्ट को नष्ट करने के बजाए खुले में फेंका जा रहा है। इससे डॉक्टर और आम लोगों के साथ मेडिकल स्टॉफ भी बीमार हो रहे हैं। यही कारण है कि 15% डॉक्टर और लगभग 30% हेल्थ वर्कर सांस की समस्या से जूझ रहे हैं। कोरोना के दौर में सांस की यह समस्या जानलेवा भी हो सकती है।
हवा के साथ उड़ता है मेडिकल वेस्ट
पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में जगह-जगह मेडिकल वेस्ट फेंका जाता है। यह हवा के साथ पूरे दिन उड़ता है। वार्डों से लेकर सड़क तक गंदगी पड़ी रहती है जिससे संक्रमण का खतरा है। यह मेडिकल वेस्ट हवा में उड़ता है और छोटे छोटे कण में लोगों की सांस में मिल जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर मेडिकल का कचरा हवा में उड़ता है तो यह सांस के साथ फेफड़े तक पहुंच जाता है। फेफड़े में गंभीर संक्रमण का यह बड़ा कारण बनता है।
हवा में कोरोना वार्ड का कचरा
कोरोना वार्ड में जिस गलव्स और PPE किट को पहनकर डॉक्टर गंभीर मरीजों का इलाज कर रहे हैं उसे खुले में फेंका जा रहा है। पोस्टमार्टम हाउस के आसपास भी ऐसे ही कचरा सड़क पर फेंका जाता है। यहां से भी कचरा उड़कर हवा में फैलता है। इसी रास्ते से होकर हार्ट के मरीज इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान जाते हैं। वह रास्ते में कचरे के ढेर के बीच से होकर गुजरते हैं। ऐसे में उन्हें भी संक्रमण का खतरा रहता है। डॉक्टरों को भी दिन भर आना जाना इसी रास्ते होता है। उन्हें भी संक्रमण का खतरा हमेशा बना रहता है।
PMCH में जगह-जगह कोरोना का वेस्ट
पटना मेडिकल कॉलेज में वार्ड के आस पास ही कचरा स्टोर किया जाता है जो पूरे दिन वहीं पड़ा रहता है। खुले डस्टबिन में मरीजों के पास से निकली सुई दवाई की खाली शीशी बोतलों के साथ बैंडेज फेंके जाते हैं। हर दिन यहां ऐसे ही कचरा इकट्ठा कर दिया जाता है और उसके निस्तारण को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई जाती है। यह लोगों को बीमारी बांटने का काम कर रहा है।
पोस्टमार्टम हाउस तक फैला मेडिकल वेस्ट
पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में इंसीनेटर लगाया गया है और पूरे अस्पताल का कचरा यहां नष्ट किया जाता है। लेकिन सफाई कर्मियों की मनमानी से अस्पताल की हवा में संक्रमण फैल रहा है। पोस्ट मार्टम हाउस के पास खुले में ही मेडिकल वेस्ट फेंकने से कुत्ते और पक्षी कचरा इधर उधर फैलाते हैं। हवा से भी मेडिकल वेस्ट उड़कर कैंपस में फैलता है। इससे इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान भी प्रभावित हो रहा है।




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