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कोरोना काल में 740 लोगों को नौकरी देकर बुरे फंसे सिविल सर्जन, सरकार ने मांगा जवाब

मुजफ्फरपुर. बिहार के मुजफ्फरपुर में स्वास्थ्य विभाग में हुई कोरोना काल की बहाली सिविल सर्जन डॉ एसके चौधरी के लिए गले की हड्डी बन गई है. कोरोनाकाल (Corona Crisis) में बहाल सभी कर्मियों को पहले हटाने और फिर बहाल करने को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने सिविल सर्जन (Civil Surgeon) पर कार्रवाई शुरू कर दी है. मंत्रालय के विशेष कार्य पदाधिकारी आनंद प्रकाश ने पत्र भेजकर सिविल सर्जन डॉ एसके चौधरी को शो कॉज नोटिस दिया है और 48 घंटे में जवाब भी मांगा है.

सिविल सर्जन से पूछा गया है कि किस परिस्थिति में पहले कर्मियों को हटाया गया और फिर उन्हें काम पर रख लिया गया. इस बीच सिविल सर्जन द्वारा स्वास्थ्य कर्मियों को फिर से बहाल करने आदेश को निरस्त करते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी कर्मियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. इसके साथ-साथ जिलाधिकारी द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट में जिन कर्मियों को बहाली प्रक्रिया में गड़बड़ी करने का दोषी बताया गया है उन पर भी कार्रवाई करते हुए विभाग को सूचित करने का निर्देश सिविल सर्जन को दिया गया है.बहरहाल कोरोना काल मे बहाल 740 स्वास्थ्य कर्मियों को हालत पेंडुलम जैसी हो गयी है. दरअसल पूरा मामला स्वास्थ्य विभाग में कोरोना मरीजों की देखभाल के लिए हुई अर्जेंट बहाली में भ्रष्टाचार का है. राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देश पर मुजफ्फरपुर सिविल सर्जन द्वारा एएनएम, जीएनएम, डाटा ऑपरेटर, वार्ड ब्वाय से लेकर डॉक्टर के पदों पर दैनिक भुगतान के आधार पर सैकड़ों बहाली की गई लेकिन शुरू से ही यह बहाली विवाद में पड़ गई. एक अधिवक्ता पंकज कुमार ने बहाली में लाखों की उगाही और गड़बड़ी की शिकायत डीएम से की.

जिलाधिकारी प्रणव कुमार के आदेश पर डीडीसी सुनील कुमार झा की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई गई जिसमें डीडीसी एडिशनल कलेक्टर और एसडीएम ईस्ट की संयुक्त जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपी गई.  डीएम द्वारा कोई आदेश जारी करने से पहले ही सिविल सर्जन ने गुरुवार को तमाम बहालियों को निरस्त कर दिया. शुक्रवार को सिविल सर्जन के इस निरस्तीकरण आदेश के खिलाफ सैकड़ों महिला और पुरुष स्वास्थ्य कर्मी सदर अस्पताल के पास सड़क पर उतर गए.

हंगामा और उग्र आंदोलन को पुलिस ने लाठी के बल पर खत्म करा दिया लेकिन मार खाने के बाद सिविल सर्जन ने शुक्रवार को अपना आदेश वापस लेते हुए सभी कर्मियों को 26 जुलाई तक काम पर वापस ले लिया लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लिया है और सिविल सर्जन के आदेश को रद्द करते हुए कोरोनाकाल में बहाल सभी कर्मियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. मामले में हुई जांच को लेकर जिलाधिकारी के पत्र 1541 दिनांक 16 जून 2021 का हवाला देते हुए ओएसडी आनंद प्रकाश ने सिविल सर्जन डॉ एसके चौधरी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

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