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सीतामढ़ी : कोरोना सं’क्रमण से रेलवे की तैयारी आधी-अधूरी, बाढ़-बारिश में रेलवे ट्रैक मेंटेनेंस नहीं हो पाई पूरी

हर साल बाढ़-बारिश में रेलवे ट्रैक प्रभावित होता है। पुल-पुलियों पर भी संकट मंडराने लगता है। पटरियों पर पानी चढ़ जाता है, वे टेढ़ी हो जाती हैं। पटरियों के नीचे कटान होने लगता है। ऐसे स्थलों व रेलखंडों को चिह्नित कर समय रहते कोई कदम रेलवे नहीं उठा रहा है। बेफिक्री का यही आलम रहा तो इस बरसात में गिनती की जो ट्रेनें चल भी रही हैं वो भी बंद हो सकती हैं। पिछले साल जनकपुर रोड रेलवे स्टेशन पर भी बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।

पिछले साल प्लेटफार्म एक स्थित रेल पटरी पर पानी चढ़ गया था। जुलाई 2019 में सीतामढ़ी-मुजफ्फरपुर और रक्सौल-बैरगनिया रेलखंड पर ट्रैक धंसने से ट्रेनों का परिचालन बाधित हुआ था। रेन कट के कारण सीतामढ़ी-मुजफ्फरपुर रेलखंड के परमजीवर-ताराजीवर और जुब्बा सहनी के पास रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों का परिचालन बंद करना पड़ा था। रक्सौल-बैरगनिया के बीच चैनपुर स्टेशन के पास पटरी पर रेनकट के चलते कई ट्रेनों का परिचालन रद किया गया था। समस्तीपुर रेल मंडल के बैरगनिया-कुंदवा चौनपुर रेलखंड पर रेल पटरी पर बाढ़ का पानी आ जाने से रेलगाडिय़ों का परिचालन रोकना पड़ा था। बावजूद रेलवे ने कोई सबक नहीं लिया। इस बार भी बिल्कुल वैसा ही हाल है।

रणनीति बनाई गई थी, 12 अलग- अलग स्थानों पर बोल्डर के साथ ईंट और डस्ट रखने का समस्तीपुर रेल मंडल क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित रेलवे ट्रैक को पानी से बचाने के लिए 15 जून से मॉनसून पेट्रोङ्क्षलग शुरू करने की घोषणा की गई थी। समस्तीपुर मंडल रेल प्रबंधक अशोक माहेश्वरी ने बाढ़ को लेकर इंजीनियङ्क्षरग विभाग के अधिकारियों के साथ मंत्रणा भी की। इंजीनियङ्क्षरग विभाग ने बाढ़ के दौरान राहत और बचाव कार्य के लिए सीतामढ़ी के साथ मंडल क्षेत्र के दस जगहों पर स्टोर प्वाइंट तैयार करने का काम शुरू कर दिया था। जहां बोल्डर के अलावा स्टोन, डस्ट, बल्ला और बोरा का स्टॉक किया जा रहा है।

बाढ़ के दौरान राहत बचाव सामग्री का यहां होना था स्टाक

इंजीनियङ्क्षरग विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सीतामढ़ी के अलावा समस्तीपुर, सहरसा, दरभंगा, मोहम्मदपुर, हरिनगर समेत ग्राउंड स्तर पर स्टोर बनाया गया है। इसके तहत 80 बैगन बोल्डर व 40 बैगन स्टोन डस्ट को ऑनव्हील रखा जाएगा। ताकि, जरूरत पडऩे पर प्रभावित स्थानों पर भेजी जा सके। नदियों का जल स्तर बढऩे पर वाटर लेवल जांच के लिए अलग से कर्मियों को लगाने की बात कही गई।

बाढ़ के कारण अक्सर बंद हो जाती है कई रेलखंडो पर रेलसेवा

बाढ़ के कारण अक्सर समस्तीपुर मंडल क्षेत्र के कई रेलखंड पर परिचलान प्रभावित हो जाता है। वर्ष 2004 से अब तक बढ़ के कारण मंडल क्षेत्र हमेशा प्रभावित रहा है। वर्ष 2004 की विध्वंशकारी बाढ़ ने समस्तीपुर मंडल क्षेत्र के रेल ट्रैक को तीन सौ से ज्यादा जगहों पर तोड़ दिया था। जिस कारण विभिन्न स्टेशनों पर यात्री फंस गए थे। बाढ़ के कारण सीतामढ़ी रेलवे स्टेशन पर रुके यात्री को पीने का पानी तक नसीब नहीं हो रहा था। तत्कालीन मंडल रेल प्रबंधक बीके बहमनी ने अपने प्रभाव से स्टेशन प्रांगण में यात्रियों को पीने के पानी के लिए चापाकल गड़वाया। महीनों रेलट्रैक को ठीक करने में समय लग गया। बैरगनिया के पास पुल संख्या 91 बाढ़ की तेज धार में विलीन हो गया था। उस पुल के बदले नया पुल तैयार किया गया था। दो वर्ष पूर्व बंगामती नदी के उफान के कारण हायाघट के नजदीक पुल पर पानी चढ़ गया था। जिस कारण तकरीबन दो सप्ताह तक दरभंगा-समस्तीपुर रेल सेवा बंद रही।

–बाढ़ आपदा से रेलवे ट्रैक, पुल और पुलिया को सुरक्षित रखने को लेकर बीते वर्ष 12 जगहों पर बोल्डर, ईंट, डस्ट व खाली बोरे का स्टॉक किया गया था। इस वर्ष दो और जगह बढ़ाकर कुल 14 जगहों पर ये तैयारी की गई है। बाढ़-बारिश में रेलवे ट्रैक मेंटेनेंस का काम लगातार चालू रहेगा। कहीं कोई दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।

-अनिल प्रकाश, सीनियर डीईएन को-ऑर्डिनेशन, समस्तीपुर, पूमरे।

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