पटना. लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) में चाचा और भतीजे के बीच चल रहे राजनीतिक विवाद का एक नया पोस्टर गुरुवार को पटना में चिराग गुट के कार्यकर्ताओं द्वारा जारी किया गया. चिराग (Chirag Paswan) के चाचा पशुपति पारस (Pashupati Paras) को इस पोस्टर के माध्यम से फिल्म बाहुबली के किरदार कटप्पा के रूप में दिखाया गया है और खुद चिराग पासवान को बाहुबली बताया गया है. पोस्टर में बाहुबली का वह सीन दर्शाया गया है जिसमें फिल्म के हीरो बाहुबली को उनके मुंह बोले चाचा कटप्पा के द्वारा धोखा देकर उनके पीठ में खंजर घोंप दिया जाता है.
कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये पोस्टर पटना के प्रमुख चौक चौराहों पर लगाया गया है ताकि सड़कों पर चलने वाले आम लोग इस पोस्टर को देखकर लोजपा पार्टी में चल रहे चाचा भतीजे के बीच विवाद को जान सके कि किस तरह से चाचा पशुपति पारस ने अपने भतीजे चिराग पासवान के पीठ में धोखा का खंजर घोंप कर उनका हक छीन लिया है. लोजपा में चल रहे विवाद के बाद पटना में पार्टी के पोस्टरों का रंग बदल गया है. जगह-जगह पार्टी के पोस्टर पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा बदल दिया गया है.चाचा-भतीजे के बीच छिड़ा है पोस्टर वार
लोजपा में चल रहे विवाद के कारण पार्टी दो खेमे में बंट चुकी है. एक खेमा चिराग पासवान का समर्थन कर रहा है तो दूसरा खेमा पशुपति पारस के समर्थन में खड़ा है. संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष बनने के बाद लोजपा पार्टी कार्यालय के बाहर लगाए गए तमाम वैसे पोस्ट जिसमें चिराग पासवान का चेहरा था, उन पोस्टरों को पशुपति पारस खेमे के कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय से हटाकर नया पोस्टर लगा दिया. इसमें चिराग पासवान कहीं नहीं है. मात्र पार्टी के सांसद एवं पशुपति पारस का उन पोस्टरों में चेहरा है. वहीं पारस खेमे के इस पोस्टर का जवाब देते हुए चिराग खेमे के लोजपा कार्यकर्ताओं ने आज चिराग पासवान के समर्थन और पशुपति पारस का विरोध करते हुए बाहुबली फिल्म से जुड़ा हुआ या पोस्टर जारी किया है.
चिराग चाचा पर लगा रहे आरोप
चिराग पासवान लगातार मीडिया के माध्यम से लोगों तक यह संदेश पहुंचा रहे हैं कि उनके साथ उनके चाचा ने धोखा किया है. उनके पिता जब गंभीर रूप से बीमार होकर अस्पताल में भर्ती थे तो उनके चाचा ने पार्टी तोड़ने की योजना बना ली थी. चिराग पासवान को इस बात की पहले से भनक लग चुकी थी. मगर परिवार ना टूटे इसको लेकर वह चुप रहे. चिराग पासवान और पशुपति पारस के विवाद को पूरे बिहार के साथ देश के प्रमुख राजनीतिक दल देख रहे हैं. कई राजनीतिक दलों ने इस घटना को सही बताते हुए पशुपति पारस खेमे का समर्थन किया तो कुछ प्रमुख दलों ने इस विवाद में पड़ने से अपने आप को दूर रखा है.





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