
इसके अलावा शौचालय निर्माण भी हुआ है। कागजों में निकाय खुले में शौच मुक्त यानि ओडीएफ घोषित भी हुए हैं। मगर अब स्वच्छता सर्वेक्षण के मानकों में काफी बदलाव हो गया है। अब बात सिर्फ शौचालय निर्माण तक सीमित नहीं है। उसके रखरखाव के स्तर, उससे निकलने वाले सीवेज के ट्रीटमेंट तक पहुंच चुकी है। डोर टू डोर कचरा कलेक्शन से आगे बढ़कर बात क’चरे को अलग-अलग करने और उसके प्रसंस्करण की हो रही है। इस बार के सर्वेक्षण में सबसे ज्यादा जोर सर्विस लेवल प्रोग्रेस यानि गुणवत्तापूर्ण सेवा मुहैया कराने की है। जबकि ऑनलाइन आने वाले शि’कायतों के मा’मले में भी निकाय काफी पिछड़े हुए हैं।

राज्य के सभी निकायों में शौचालय से निकलने वाली गंदगी का प्रसंस्करण करना था। मगर यह काम किसी भी निकाय ने शुरू नहीं किया। ओडीएफ प्लस और ओडीएफ प्लस प्लस श्रेणी में पटना सहित किसी भी निकाय की प्रगति ना के बराबर है।ख’राब रैंकिंग से हर मा’मले में पि’छड़ते हैं निकायनिकायों की रैंकिंग ख’राब होने का व्यापक असर होता है। केंद्र सरकार अपनी तमाम योजनाओं में अच्छी रैंकिंग वाले शहरों को ही प्राथमिकता देती है। उन्हीं निकायों को ज्यादा सुविधाएं भी दी जा रही हैं। बिहार के सभी निकाय इस मा’मले में अभी तक पि’छड़ते आ रहे हैं।




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