दिवंगत नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी में दो-फाड़ हो गई है. रामविलास पासवान के भाई पशुपति पारस ने पांच सांसदों को साथ लेकर अब पार्टी पर अपना अधिकार जता दिया है, वहीं चिराग पासवान अब अलग-थलग हो गए हैं. बिहार की राजनीति में बीते दिन अचानक ही नया मोड़ सामने आ गया. लोक जनशक्ति पार्टी में टूट हो गई.
इस बीच खबर है कि चाचा पशुपति पारस को मनाने के लिए चिराग पासवान उनके घर पहुंचे हैं. लेकिन सूत्रों के अनुसार पशुपति पारस आवास पर मौजूद नहीं हैं. रिपोर्ट के मुताबिक चिराग पासवान चाचा पारस के घर के बाहर 25 मिनट तक खड़े रहे तब जाकर उनके लिए दरवाजा खुला
पशुपति पारस ने कहा कि हमारी पार्टी में 6 सांसद हैं. 5 सांसदों की इच्छा थी की पार्टी का अस्तित्व खत्म हो रहा है, इसलिए पार्टी को बचाया जाए. मैं पार्टी तोड़ा नहीं हूं, पार्टी को बचाया हूं. चिराग पासवान से कोई शिकायत नहीं है. कोई आपत्ति नहीं है वे पार्टी में रहें. जबतक मैं जिंदा हूं, पार्टी को जिंदा रखूंगा, अभी भी ओरिजनल पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी ही है.”
पारस ने कहा कि पार्टी में मैं अकेला महसूस कर रहा हूं. पार्टी के 99% कार्यकर्ता, सांसद, विधायक और समर्थक सभी की इच्छा थी कि हम 2014 में NDA गठबंधन का हिस्सा बनें और इस बार के विधानसभा चुनाव में भी हिस्सा बने रहें, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. लोक जनशक्ति पार्टी बिखर रही थी कुछ असामाजिक तत्वों ने हमारी पार्टी में सेंध डाला और 99% कार्यकर्ताओं के भावना की अनदेखी करके गठबंधन को तोड़ दिया.


Input : Live Cities



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