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मुजफ्फरपुर की राजनीति में उबाल, भाजपा और कांग्रेस एक-दूसरे के आमने-सामने

कोरोना की दूसरी लहर और लॉकडाउन के कारण मंद पड़ी राजनीति की आग अब तेज होेने लगी है। फिर से आरोप-प्रत्यारोप का क्रम शुरू हो गया है। मुजफ्फरपुर में भाजपा अौर कांग्रेस एक-दूसरे के आमने-सामने आ गई है। बयानबाजी होने से जिले का राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।

दरअसल, कुछ ही दिन पहले पूर्व नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश कुमार शर्मा ने शहर में हो रहे नाला निर्माण का मौका मुआयना किया था। इस दौरान उन्होंने काम की गुणवत्ता और समय सीमा को लेकर टिप्पणी की थी। काम में कोताही बरतने पर कार्रवाई कराने की बात कही थी। यह चीज कांग्रेस वालों को बुरी लगी। बस फिर क्या था, जिलाध्यक्ष अरविंद कुमार मुकुल ने सुरेश कुमार शर्मा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कहा कि पूर्व नगर विकास एवं आवास मंत्री अभी तक अपनी हार नहीं पचा पाए हैं। वे सड़क एवं नाला निर्माण कार्य का निरीक्षण करने का नाटक कर रहे हैं। नगर विधायक एवं मंत्री रहते हुए कुछ नहीं कर पाए। केवल बयानबाजी और घोषणाएं करते रहे। अपने कार्यकाल में एक भी काम नहीं करा पाए। इसकी सजा बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान जनता ने उन्हें दी। कांग्रेस के उम्मीदवार को विधायक चुना। वे अब तेजी से काम कर रहे हैं। हर ओर विकास हो रहा है। यह उनसे पच नहीं पा रहा है। इसलिए जनता के बीच जाकर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। दूसरे के काम का क्रेडिट लेना चाह रहे हैं, लेकिन उनका नाटक अधिक दिनों तक चलने वाला नहीं है। लोगों को सब पता है कि कौन काम करने वाला है अौर कौन दिखावा करने वाला।

मालूम हो कि पूर्व नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश कुमार शर्मा को बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान कांग्रेस के उम्मीदवार विजेंद्र चौधरी के हाथों कम वोटों के अंतर से हार का मुंह देखना पड़ा था। हालांकि इसकी समीक्षा के दौरान कई तरह की बातें सामने आई थीं, लेकिन वर्ष 2020 की बारिश के दौरान शहर में हुए जलजमाव को इसका मुख्य कारण बताया गया। कांग्रेस का आरोप है कि सुरेश शर्मा इस तरह का निरीक्षण कर जनता को यह बताना चाह रहे हैं कि यह सबकुछ उन्हीं का कराया हुआ है। मगर, यह चाल कामयाब होने वाली नहीं है।

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